हिन्दी दिवस पखवाड़े पर काव्य गोष्ठी एवं परिचर्चा का आयोजन, साहित्यकारों ने साझा किए विचार जगदलपुर (विमलेंदु शेखर झा)। हिन्दी दिवस पखवाड़े क...
हिन्दी दिवस पखवाड़े पर काव्य गोष्ठी एवं परिचर्चा का आयोजन, साहित्यकारों ने साझा किए विचार
जगदलपुर (विमलेंदु शेखर झा)। हिन्दी दिवस पखवाड़े के अवसर पर लाला जगदलपुरी केंद्रीय ग्रंथालय में प्रेम सदन (साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था) तथा हिन्दी साहित्य भारती, जिला इकाई जगदलपुर के संयुक्त तत्वावधान में काव्य गोष्ठी एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। 29 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम दो सत्रों में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित एवं पूजन कर किया।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में “हिन्दी साहित्य की समृद्धि में बस्तर के साहित्यकारों का योगदान” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। वरिष्ठ साहित्यकार हिमांशु शेखर झा और शशांक श्रीधर शेंडे ने प्रमुख वक्ता के रूप में अपने विचार रखे।
हिमांशु शेखर झा ने कहा कि हिन्दी साहित्य की समृद्धि को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है। बस्तर में हिन्दी भाषा में रचनाशील साहित्यकारों के साथ यहां की विभिन्न लोक भाषाओं, वाचिक परंपराओं, लोककथाओं, लोकगीतों और समूचे लोक साहित्य का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने भतरी नाट और लक्ष्मी जगार जैसी लोक परंपराओं को बस्तर की समृद्ध साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
शशांक श्रीधर शेंडे ने बस्तर के साहित्यकारों के साहित्यिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए पं. केदारनाथ ठाकुर की ‘बस्तर भूषण’, लाला जगदलपुरी, गुलशेर अहमद शानी की ‘काला जल’, हरिहर वैष्णव, के.के. झा, बी.एल. झा और कृष्ण कुमार शुक्ल सहित अनेक साहित्यकारों की रचनात्मक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बस्तर की साहित्यिक पहचान को मजबूत बनाने में इन रचनाकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में काव्य गोष्ठी आयोजित हुई, जिसमें कवि-साहित्यकारों ने हिन्दी और बस्तर की भाषाई-सांस्कृतिक संवेदना से जुड़ी रचनाओं का पाठ किया। शिवसागर त्रिपाठी ने आध्यात्मिक कविता प्रस्तुत की। शशांक श्रीधर शेंडे, चमेली नेताम, युवा कवि श्रीवर सिंह ठाकुर, भोजराज साहू, डॉ. आशा पटनायक, रामेश्वर चंद्रा, हिमांशु शेखर झा और डॉ. पूर्णिमा सरोज ने अपनी-अपनी कविताओं का पाठ कर श्रोताओं को साहित्यिक भावभूमि से जोड़ा।
कविताओं में हिन्दी भाषा के गौरव, संस्कृति, सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाओं को प्रमुखता से अभिव्यक्त किया गया। चमेली नेताम की रचना में हिन्दी को देश की पहचान और गौरव से जोड़ा गया, वहीं युवा कवि श्रीवर सिंह ठाकुर ने हिन्दी को जन-जन के अभिमान के रूप में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर बस्तर में आई बाढ़ और बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई। उपस्थित साहित्यकारों एवं गणमान्य नागरिकों ने अपने स्तर पर बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए हरसंभव सहयोग करने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन चमेली नेताम ने किया। लाला जगदलपुरी केंद्रीय ग्रंथालय के सहयोग के लिए डॉ. पूर्णिमा सरोज ने सभी अतिथियों, कवियों, साहित्यकारों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कवि, साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


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