जगदलपुर: आगामी 14 जनवरी 2026, मकर संक्रांति के पावन अवसर पर जगदलपुर के ऐतिहासिक एवं गौरवशाली दलपत सागर में भव्य दलपत दीपोत्सव का आयोजन किया ...
जगदलपुर:
आगामी 14 जनवरी 2026, मकर संक्रांति के पावन अवसर पर जगदलपुर के ऐतिहासिक एवं गौरवशाली दलपत सागर में भव्य दलपत दीपोत्सव का आयोजन किया जाएगा। दीपों की रोशनी से दलपत सागर को आलोकित करने वाला यह आयोजन धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चेतना का प्रतीक बनेगा।
दीपोत्सव की रूपरेखा को अंतिम रूप देने हेतु दलपत सागर आइलैंड में आयोजित बैठक में महापौर संजय पांडेय की अगुवाई में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में निर्णय लिया गया कि यह आयोजन नगरवासियों की सामूहिक भागीदारी से भव्य रूप में संपन्न होगा, ताकि दलपत सागर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय गरिमा को संरक्षित किया जा सके।
महापौर संजय पांडेय ने शहर के सभी वर्गों सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं, व्यापारिक संस्थाओं एवं आम नागरिकों से दीपोत्सव में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा,
यह दीपोत्सव केवल उत्सव नहीं, बल्कि स्वच्छता, सांस्कृतिक चेतना और पर्यावरण संरक्षण को सशक्त करने का सामूहिक अभियान है। आइए, दीपों की रोशनी से दलपत सागर को और अधिक स्वच्छ, सुंदर एवं गौरवशाली बनाएं और स्वच्छ जगदलपुर के संकल्प को साकार करें।
बैठक में नगर निगम आयुक्त प्रवीण वर्मा सहित जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने आयोजन को ऐतिहासिक बनाने पर अपने विचार रखे। दीपोत्सव के माध्यम से स्वच्छता का संदेश, जल-संरक्षण और सांस्कृतिक एकता को जन-जन तक पहुँचाने का लक्ष्य तय किया गया।
बैठक में प्रमुख रूप से अनिल लुंकड़, संपत झा, धीरज कश्यप, रामनरेश पांडे, विधु शेखर झा, संग्राम सिंह राणा, लक्ष्मण झा, एच.वाई. कुकड़े, कल्पना वर्मा, सुलता महाराणा, अनिल अग्रवाल, मुकेश सिंह, राजकुमार पाठक, अनिल झा, शशिनाथ पाठक, रतन व्यास, धर्मेंद्र महापात्र, कलविंदर सिंह, वीरेंद्र बहुते, रितेश सिन्हा, गोपाल भारद्वाज, हेमंत श्रीवास, विजय बहादुर, सृष्टि की टीम, दलपत सागर बचाओ अभियान की टीम, त्रिवेणी रंधारी, नीलम यादव, माहेश्वरी ठाकुर, गीता नाग, कलावती कसेर, रोशन सिसोदिया, राजपाल कसेर, ममता राणा, बसंती समरथ, राधा बघेल, सतरूपा मिश्रा सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
दीपोत्सव की घोषणा के बाद शहरवासियों में उत्साह का माहौल है। माना जा रहा है कि यह आयोजन जगदलपुर के इतिहास में एक यादगार, प्रेरणादायक और सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने वाला महोत्सव सिद्ध होगा।


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