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बस्तर के विकास पर सियासी घमासान: 1 करोड़ प्रति ग्राम पंचायत, 50 हजार करोड़ पैकेज और रोजगार पर उठी मांगें

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रायपुर/बस्तर: बस्तर के समग्र विकास, युवाओं के रोजगार और सरकारी योजनाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। क्षेत्री...

रायपुर/बस्तर:

बस्तर के समग्र विकास, युवाओं के रोजगार और सरकारी योजनाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। क्षेत्रीय मुद्दों को उठाते हुए सरकार से कई बड़ी मांगें रखी गई हैं, जिनमें ग्राम पंचायतों को आर्थिक सहायता, विशेष पैकेज और रोजगार सृजन प्रमुख हैं।

ग्राम पंचायतों को 1 करोड़ देने की मांग:

मांग की गई है कि बस्तर सहित प्रदेश के सभी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों को तत्काल 1 करोड़ रुपये की राशि दी जाए। तर्क दिया गया कि सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है कि जो पंचायत नक्सल मुक्त होगी, उसे यह राशि प्रदान की जाएगी। अब जब सरकार खुद प्रदेश को नक्सल मुक्त बता रही है, तो इस वादे को पूरा करने का समय आ गया है।

50 हजार करोड़ का विशेष पैकेज जरूरी:

बस्तर को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए केंद्र और राज्य की “डबल इंजन” सरकार से 50 हजार करोड़ रुपये के विशेष आर्थिक पैकेज की मांग उठाई गई है। इस पैकेज के जरिए क्षेत्र में बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योगों को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

 युवाओं के लिए विशेष भर्ती अभियान:

बस्तर के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने हेतु विशेष भर्ती अभियान चलाने की मांग की गई है।

साथ ही वनोपज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन पर जोर दिया गया है।

NMDC मुख्यालय बस्तर में लाने की मांग:

NMDC Limited

देश की प्रमुख खनन कंपनी एनएमडीसी, जो बस्तर से लौह अयस्क निकालती है, उसका मुख्यालय हैदराबाद में स्थित है।

मांग की गई है कि बदलते हालात और बेहतर सुविधाओं को देखते हुए कंपनी का मुख्यालय बस्तर में स्थापित किया जाए, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें।

खनिज संपदा और निजीकरण को लेकर आशंका:

स्थानीय लोगों में यह आशंका जताई गई है कि बस्तर की खनिज संपदा और जंगलों को निजी उद्योगपतियों को सौंपा जा सकता है।

सरकार से मांग की गई है कि वह स्पष्ट गारंटी दे कि क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा और महत्वपूर्ण परियोजनाएं निजी हाथों में नहीं जाएंगी।

रेल कनेक्टिविटी पर सवाल:

दल्लीराजहरा–जगदलपुर रेल लाइन

बस्तर में रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने की मांग भी प्रमुखता से उठी है।

दल्लीराजहरा से जगदलपुर तक प्रस्तावित रेल लाइन, जिसका उद्घाटन 2017-18 में किया गया था, अब तक पूरी नहीं हो सकी है। इसे क्षेत्र की जनता के साथ वादा खिलाफी बताया गया।

महिला एवं बाल विकास विभाग पर गंभीर आरोप:

महिला एवं बाल विकास विभाग पर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

मुख्य आरोप:

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को घटिया और कम माप की साड़ियों का वितरण

पोषण आहार खरीदी में अनियमितता (40 करोड़ से अधिक)

सामूहिक कन्या विवाह योजना में बिना टेंडर कार्य

16 करोड़ की लागत से टीवी और RO यूनिट खरीद में नियमों की अनदेखी

सैनिटरी पैड खरीदी में भी भ्रष्टाचार के आरोप

मांग की गई है कि:

खराब गुणवत्ता की साड़ियां वापस ली जाएं

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अच्छी गुणवत्ता की सामग्री दी जाए

संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो

बस्तर के विकास, संसाधनों के उपयोग, रोजगार और पारदर्शिता जैसे मुद्दों को लेकर उठी ये मांगें आने वाले समय में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती हैं।

अब देखना होगा कि सरकार इन मुद्दों पर क्या रुख अपनाती है और जमीनी स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

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