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धर्मांतरण से आदिवासी अस्मिता पर खतरा, राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग : अरविंद नेताम

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जगदलपुर(विमलेंदु शेखर झा):    बस्तर के वरिष्ठ आदिवासी नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने जनजातीय समाज में बढ़ते धर्मांतरण और उसस...

जगदलपुर(विमलेंदु शेखर झा):   बस्तर के वरिष्ठ आदिवासी नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने जनजातीय समाज में बढ़ते धर्मांतरण और उससे उत्पन्न सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर केंद्र सरकार से ठोस हस्तक्षेप की मांग की है। शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल धर्म परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी अस्मिता, सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है।

अरविंद नेताम ने कहा कि देशभर में आदिवासी समाज अपनी परंपरागत संस्कृति, रीति-रिवाज और धार्मिक पहचान को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य कारणों से वे स्वयं प्रतिनिधिमंडल के साथ उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में इस गंभीर विषय पर राष्ट्र स्तर पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश से लेकर कश्मीर और कन्याकुमारी तक एक लाख से अधिक जनजातीय समाज के लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए आंदोलनरत हैं। उनका कहना है कि आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना आवश्यक है।

प्रेस वार्ता में मौजूद छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के राजाराम तोड़ेम और दशरथ कश्यप ने भी इस विषय पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों और मान्यताओं का पालन छोड़कर अन्य धर्म अपना चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद वे जनजातीय आरक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। इससे मूल आदिवासी समाज में असंतोष बढ़ रहा है।

नेताओं ने मांग की कि जो लोग धर्मांतरण के बाद पारंपरिक जनजातीय पहचान और सामाजिक व्यवस्था से अलग हो चुके हैं, उन्हें जनजातीय वर्ग के विशेष लाभों की पात्रता पर पुनर्विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि यह मांग वर्षों से उठाई जा रही है और सरकार को इस दिशा में स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।

अरविंद नेताम ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि जनजातीय समाज की संवैधानिक सुरक्षा, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार आवश्यक कदम उठाए। उन्होंने कहा कि इस पूरे विषय की निष्पक्ष समीक्षा कर सामाजिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में ठोस नीति निर्धारण किया जाना चाहिए।

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