रायपुर: छत्तीसगढ़ में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में संचालित महतारी वंदन योजना अब घर-गृहस्थी की जरूरतों में आर्थिक मदद देने के सा...
रायपुर: छत्तीसगढ़ में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में संचालित महतारी वंदन योजना अब घर-गृहस्थी की जरूरतों में आर्थिक मदद देने के साथ महिलाओं के लिए आजीविका और स्वरोजगार का आधार भी बन रही है। योजना के तहत मिलने वाली 1,000 रुपये की मासिक सहायता राशि का उपयोग कई महिलाएं अपने छोटे कारोबार को बढ़ाने, सामान का स्टॉक बढ़ाने और आय के नए साधन विकसित करने में कर रही हैं।
योजना से जुड़ी सहायता, स्वयं सहायता समूहों और स्वरोजगार के लिए उपलब्ध ऋण के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। यही प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ के विजन को जमीन पर साकार करने में भी मददगार साबित हो रहे हैं।
68 लाख से अधिक महिलाओं को मिल रहा योजना का लाभ
महतारी वंदन योजना राज्य की प्रमुख महिला-केंद्रित योजनाओं में शामिल है। योजना के तहत प्रदेश की करीब 68 लाख महिला लाभार्थियों को लाभ मिल रहा है। अब तक 31 किस्तों में 20,075.38 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष के राज्य बजट में योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बिना गारंटी के ऋण से बढ़ रहे स्वरोजगार के अवसर
महतारी वंदन योजना की पूरक महतारी शक्ति ऋण योजना भी महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध करा रही है। नवंबर 2024 से अब तक करीब 41,124 लाभार्थियों को 102.38 करोड़ रुपये के बिना गारंटी वाले स्वरोजगार ऋण का लाभ मिल चुका है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के अनुसार, इस ऋण के माध्यम से सब्जी विक्रय, कारीगरी और अन्य छोटे कारोबार से जुड़ी महिलाओं को अपना व्यवसाय बढ़ाने तथा परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिल रही है।
महिलाओं की सफलता की कहानियां बनीं मिसाल
रानू कैवर्त, आंदी गांव, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
रानू कैवर्त सिलाई, कपड़े और किराने के कारोबार के साथ बटेर एवं देसी मुर्गी पालन तथा हैचरी का काम कर रही हैं। इन गतिविधियों से उन्हें सालाना करीब 3 लाख रुपये की आय हो रही है।
सीता मरावी, गुडुमदेवारी
सीता ने किराने की दुकान शुरू करने के लिए बैंक से 25 हजार रुपये और मुर्गी पालन के लिए स्वयं सहायता समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लिया। कारोबार के विस्तार के साथ उनकी सालाना आय करीब 2.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
सुमन लता वाकरे, गुडुमदेवारी
सुमन लता ने स्वयं सहायता समूह से 15 हजार रुपये की मदद लेकर किराने की दुकान शुरू की। बाद में बैंक ऋण के जरिए कारोबार का विस्तार किया और अब उनकी सालाना आय एक लाख रुपये से अधिक हो गई है।
केजू बाई सलामे, रामगढ़, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी
केजू बाई महतारी वंदन योजना से मिलने वाली 1,000 रुपये की मासिक राशि का उपयोग किराने की दुकान के लिए सामान का स्टॉक बढ़ाने में करती हैं। इससे उनकी बिक्री में वृद्धि हुई है और वह लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी
10 मार्च 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्चुअल मौजूदगी में शुरू हुई महतारी वंदन योजना को महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़कर देखा जा रहा है। राज्य में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 13.85 लाख महिला सदस्य पहले ही लखपति दीदी की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।
राज्य सरकार द्वारा लखपति दीदी भ्रमण योजना के लिए भी बजटीय प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से लखपति दीदियों को देश के विभिन्न व्यापारिक एवं आर्थिक केंद्रों के साथ प्रमुख शक्तिपीठों के भ्रमण का अवसर देने की योजना है।
इस तरह महतारी वंदन योजना की नियमित आर्थिक सहायता, स्वयं सहायता समूहों की ताकत और स्वरोजगार के लिए ऋण जैसी सुविधाएं मिलकर प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में भूमिका निभा रही हैं।


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