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सामाजिक पाखंड और विसंगतियों पर तीखा प्रहार ही व्यंग्य की भूमिका : गिरीश पंकज

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रायपुर। नव-छत्तीसगढ़ साहित्य, सांस्कृतिक संस्थान के तत्वावधान में सोमवार को सिविल लाइंस स्थित वृंदावन मीटिंग हॉल में ‘समकालीन परिदृश्य में ...

रायपुर। नव-छत्तीसगढ़ साहित्य, सांस्कृतिक संस्थान के तत्वावधान में सोमवार को सिविल लाइंस स्थित वृंदावन मीटिंग हॉल में ‘समकालीन परिदृश्य में व्यंग्य की भूमिका’ विषय पर विमर्श एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, कवियों और व्यंग्यकारों ने बदलते सामाजिक परिवेश में व्यंग्य की भूमिका, उसकी प्रासंगिकता और साहित्यिक जिम्मेदारी पर विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार, व्यंग्यकार, लेखक एवं कवि गिरीश पंकज रहे। अध्यक्षता व्यंग्यकार, लेखक, कवि एवं स्तंभकार संजीव कुमार ठाकुर ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार एवं भाषाविद् डॉ. चितरंजन कर, वरिष्ठ साहित्यकार, कवि एवं गीतकार डॉ. मानिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ तथा वरिष्ठ व्यंग्यकार सुरेंद्र रावल उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि गिरीश पंकज ने कहा कि व्यंग्य हर काल में समाज को आईना दिखाने का काम करता रहा है। कबीर और भारतेंदु हरिश्चंद्र से लेकर आजादी के बाद हरिशंकर परसाई और शरद जोशी जैसे रचनाकारों तक व्यंग्य ने सामाजिक विसंगतियों और पाखंड के विरुद्ध अपनी सशक्त भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि व्यंग्यकारों ने अनेक अवसरों पर अभिव्यक्ति के जोखिम उठाकर समाज की वास्तविक तस्वीर सामने रखने का कार्य किया है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में संजीव कुमार ठाकुर ने कहा कि व्यंग्य को केवल हास्य-विनोद तक सीमित नहीं किया जा सकता। यह समाज की विसंगतियों, विडंबनाओं और परिस्थितियों पर गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित करने वाली महत्वपूर्ण साहित्यिक विधा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक और तकनीकी परिवेश में बदलाव के साथ व्यंग्य की भाषा, विषय-वस्तु और अभिव्यक्ति के स्वरूप में भी परिवर्तन आया है।

डॉ. चितरंजन कर ने वर्तमान समय में व्यंग्यकार की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यंग्य के माध्यम से समाज के विभिन्न पहलुओं को रचनात्मक और प्रभावी ढंग से सामने रखा जा सकता है।

वहीं डॉ. मानिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ ने साहित्य में व्यंग्य की परंपरा, उसकी सामाजिक जिम्मेदारी और वर्तमान समय में व्यंग्य लेखन के सामने मौजूद चुनौतियों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में व्यंग्य विभिन्न साहित्यिक विधाओं और माध्यमों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण वरिष्ठ व्यंग्यकार सुरेंद्र रावल का सम्मान रहा। 87 वर्षीय सुरेंद्र रावल को साहित्य और व्यंग्य लेखन में उनके दीर्घ योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया। इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों ने उनके साहित्यिक योगदान और सक्रियता की सराहना की।

विमर्श के बाद आयोजित काव्य गोष्ठी में भूपेंद्र शर्मा, वीरेंद्र शर्मा, रामजी ध्रुव, ऋषभ देव साहू, सुनील पांडे, गोपाल सोलंकी, माधुरीका, गोपा शर्मा, डॉ. उदयभान सिंह चौहान, यशवंत यदु, छबिलाल सोनी, रुनाली चक्रवर्ती, मन्नूलाल यदु, शकुंतला तरार, राजेंद्र, मंजूषा, रंजीता शर्मा, प्रज्ञा रावल एवं रविश गुप्ता ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।

रचनाकारों की प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में साहित्यिक वातावरण जीवंत हो उठा। कार्यक्रम में साहित्य एवं संस्कृति से जुड़े अनेक रचनाकार, साहित्यप्रेमी और गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का आयोजन एवं समन्वय नव-छत्तीसगढ़ साहित्य, सांस्कृतिक संस्थान द्वारा किया गया। संचालन संस्थान के महासचिव शशांक खरे एवं सुषमा पटेल ने किया। अंत में उदय भान सिंह चौहान ने आभार व्यक्त किया।


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