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बस्तर की लोकसंस्कृति से साहित्य तक, डॉ. रूपेन्द्र कवि को मिलेगा छत्तीसगढ़ गौरव अवार्ड

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मानवशास्त्र , साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में बहुआयामी पहचान का होगा सम्मान; 25 अक्टूबर को रायपुर में सजेगा गौरव समारोह रायपुर, 22 अक्टू...

मानवशास्त्र, साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में बहुआयामी पहचान का होगा सम्मान; 25 अक्टूबर को रायपुर में सजेगा गौरव समारोह

रायपुर, 22 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, साहित्यिक चेतना और सामाजिक सरोकारों से जुड़े व्यक्तित्वों को सम्मानित करने की कड़ी में डॉ. रूपेन्द्र कवि का नाम भी शामिल है। मानवशास्त्री, साहित्यकार और परोपकार की भावना से जुड़े व्यक्तित्व के रूप में पहचान रखने वाले डॉ. कवि को छत्तीसगढ़ गौरव अवार्ड से सम्मानित करने का प्रस्ताव है। दैनिक ‘दबंग स्वर’ के छठे स्थापना दिवस पर आयोजित होने वाला यह समारोह 25 अक्टूबर को रायपुर में होगा।

डॉ. रूपेन्द्र कवि वर्तमान में छत्तीसगढ़ लोकभवन के संवैधानिक प्रकोष्ठ में उप सचिव के पद पर कार्यरत हैं। प्रशासनिक दायित्वों के साथ मानवशास्त्र और साहित्य से उनका जुड़ाव उनके व्यक्तित्व को बहुआयामी बनाता है। उनके व्यक्तित्व के इन्हीं विभिन्न पक्षों को केंद्र में रखते हुए सम्मान समारोह में उनके योगदान को रेखांकित किया जाएगा।

बस्तर की परंपराओं को अकादमिक दृष्टि से समझने की पहल:

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत में बस्तर की जनजातीय परंपराओं, लोकविश्वासों, पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक जीवन का विशेष महत्त्व है। इन परंपराओं को समझना केवल अतीत को जानना नहीं, बल्कि उन सामाजिक मूल्यों और जीवन-दृष्टि को पहचानना भी है, जिन्होंने पीढ़ियों से स्थानीय समुदायों की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रखा है।

डॉ. रूपेन्द्र कवि से संबंधित पूर्व संदर्भों में बस्तर की लोकपरंपराओं पर उनके शोधपत्र का उल्लेख मिलता है। मानवशास्त्रीय अध्ययन के माध्यम से ऐसे विषयों को सामने लाना क्षेत्रीय संस्कृति, जनजातीय जीवन और पारंपरिक ज्ञान परंपराओं को व्यापक बौद्धिक विमर्श से जोड़ने की दिशा में महत्त्वपूर्ण है।

साहित्य और संवेदना से समाज को जोड़ने का प्रयास

साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ उसकी संवेदनाओं, संघर्षों और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति भी है। मानवशास्त्र जहां समाज की संरचना और सांस्कृतिक व्यवहार को समझने का आधार देता है, वहीं साहित्य इन अनुभवों को शब्दों और विचारों के माध्यम से व्यापक समाज तक पहुंचाता है।

डॉ. कवि के व्यक्तित्व में साहित्यिक अभिरुचि और मानवशास्त्रीय दृष्टिकोण का यह मेल विशेष उल्लेखनीय है। इसके साथ परोपकार और सामाजिक उत्तरदायित्व का पक्ष उन्हें समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टि रखने वाले व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत करता है। शिक्षा, सांस्कृतिक जागरूकता, मानवीय गरिमा और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता जैसे विषय सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव की आधारभूमि तैयार करते हैं।

प्रशासनिक दायित्व के साथ बौद्धिक पहचान

छत्तीसगढ़ लोकभवन के संवैधानिक प्रकोष्ठ में उप सचिव के रूप में डॉ. रूपेन्द्र कवि की भूमिका उनके प्रशासनिक परिचय का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि प्रशासनिक दायित्व, साहित्यिक अभिरुचि और मानवशास्त्रीय अध्ययन अलग-अलग क्षेत्र हैं, लेकिन इनका समन्वय किसी व्यक्ति के व्यापक सार्वजनिक व्यक्तित्व को समझने का अवसर प्रदान करता है।

छत्तीसगढ़ जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य में लोकपरंपराओं, साहित्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विमर्श को प्रोत्साहन देना विशेष महत्त्व रखता है। इसी परिप्रेक्ष्य में डॉ. कवि को प्रस्तावित सम्मान उनके विविध परिचय को सार्वजनिक मंच पर रेखांकित करने की पहल है।

25 अक्टूबर को रायपुर में होगा भव्य आयोजन

दैनिक ‘दबंग स्वर’ के छठे स्थापना दिवस पर वक्ता मंच के संयुक्त तत्वावधान में छत्तीसगढ़ गौरव अवार्ड समारोह आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों के आमंत्रण के अनुसार कार्यक्रम रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजे वृंदावन सभागृह, सिविल लाइंस, रायपुर में निर्धारित है।

आयोजन से जुड़े प्रमुख लोगों में दैनिक ‘दबंग स्वर’ के प्रधान संपादक पंडित पी.के. तिवारी, वक्ता मंच के अध्यक्ष राजेश पराते और संयोजक शुभम साहू शामिल हैं। समारोह का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित करना और सामाजिक-साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है।

सम्मान के साथ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान पर भी रहेगा जोर:

डॉ. रूपेन्द्र कवि को प्रस्तावित छत्तीसगढ़ गौरव अवार्ड केवल एक सम्मान समारोह का हिस्सा नहीं, बल्कि राज्य की लोकसंस्कृति, साहित्यिक चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े विषयों को चर्चा में लाने का अवसर भी है। बस्तर की लोकपरंपराओं से लेकर साहित्य और मानवीय सरोकारों तक, ऐसे विविध विषय छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को व्यापक समाज के सामने रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

रायपुर में 25 अक्टूबर को होने वाला यह आयोजन विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े व्यक्तित्वों के योगदान को सम्मान देने के साथ प्रदेश की बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर बनेगा।

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