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बस्तर के पारंपरिक नेतृत्वकर्ताओं को सौगात

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 राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी मौजूदगी में मांझी-चालकी के मानदेय में बढ़ोतरी जगदलपुर (विमलेंदु शेखर झा) : राष्ट्रपति श्रीमती...

 राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी मौजूदगी में मांझी-चालकी के मानदेय में बढ़ोतरी

जगदलपुर (विमलेंदु शेखर झा) : राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के बस्तर प्रवास के दौरान बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक सामाजिक ताने-बाने को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य शासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर बस्तर संभाग के पारंपरिक सामाजिक प्रमुखों—मांझी और चालकी—के मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। इस महत्वपूर्ण फैसले के तहत अब मांझी का मानदेय 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति माह और चालकी का मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।

इस ऐतिहासिक निर्णय की औपचारिक घोषणा जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित एक विशाल आमसभा के दौरान राज्य के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल द्वारा की गई। यह अवसर उस समय और भी अधिक गरिमामयी बन गया, जब देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु स्वयं इस वृहद आयोजन में उपस्थित रहीं।

महत्वपूर्ण यह है कि शासन ने इस घोषणा को केवल मंच तक सीमित न रखते हुए इस पर तत्काल अमल भी सुनिश्चित कर दिया है। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मानदेय व सम्मान राशि मद में कुल 38 लाख 52 हजार रुपये के आबंटन और व्यय की औपचारिक प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति का आदेश जारी कर दिया गया है। इस आदेश के तहत अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 तक की अवधि के साथ-साथ अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 तक बढ़ी हुई दरों पर राशि के भुगतान की पूरी व्यवस्था कर दी गई है, जिससे घोषणा पर त्वरित क्रियान्वयन की मुहर लग गई है।

आम सभा में संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय सरकार जनजातीय समाज के मान-सम्मान और उनकी गौरवशाली परंपराओं के संरक्षण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। बस्तर के सामाजिक संतुलन, सांस्कृतिक धरोहर के संवर्धन और ऐतिहासिक बस्तर दशहरा जैसे महापर्व के सफल संचालन में मांझी और चालकी की भूमिका सदैव केंद्रीय रही है। ऐसे में मानदेय में की गई यह सम्मानजनक वृद्धि और उस पर तुरंत हुआ यह अमल सदियों पुरानी व्यवस्था को सहेजने वाले पारंपरिक नेतृत्व के प्रति शासन के आदर भाव को दर्शाता है।

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