Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

जैव चिकित्सा अपशिष्ट के लिए जागरूक नहीं स्वास्थ्य विभाग, बस्तर के इस उप स्वास्थ्य केंद्र में खतरनाक अपशिष्ट खुले में,

यह भी पढ़ें -

• उप स्वास्थ्य केंद्र के पीछे खुले में फेंका गया खतरनाक चिकित्सकीय अपशिष्ट • संक्रामक रोगों और बड़े हादसों को निमंत्रण देती अस्पताल प्रबंधन ...

• उप स्वास्थ्य केंद्र के पीछे खुले में फेंका गया खतरनाक चिकित्सकीय अपशिष्ट
• संक्रामक रोगों और बड़े हादसों को निमंत्रण देती अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही
• उप स्वास्थ्य केंद्र में उपस्थित स्वास्थ्य कर्मी ने दी भ्रामक जानकारियां
• खंड चिकित्सा अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने नकारी कर्मचारी के डीप बेरिअल पिट की मांग किए जाने की बात।



जगदलपुर (वेदांत झा): जनपद बस्तर के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत भोंण्ड में खतरनाक जैव चिकित्सा अपशिष्ट को लेकर लापरवाही देखने को मिली। बता दे हमारे संवाददाता ने जब इस उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ आर एच ओ लेखराज बघेल से जैव चिकित्सा अपशिष्ट के प्रबंधन को लेकर सवाल किए तो उन्होंने बताया कि यहां इकट्ठा हुए अपशिष्ट को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बस्तर में भेजा जाता है। जबकि यहां प्रभारी खंड चिकित्सा अधिकारी ने कहा 

एक भ्रामक जानकारी देते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर ठीकरा फोड़ते हुए कहा कि उनके द्वारा जनप्रतिनिधियों को यह पीट बनाने के लिए कहा गया है और परसों ही जब यहां के जनप्रतिनिधियों आए थे तब भी उन्हें इस बारे में कहा गया है। जिससे यह अपशिष्ट निस्तारित हो सके। इस पर जब हमारे प्रतिनिधि ने स्थानीय सरपंच चंपा बघेल, सचिव दिलीप कश्यप और जिला पंचायत सदस्य गणेश बघेल से चर्चा की तो उन्होंने स्वास्थ्य कर्मी द्वारा इस जगह पर किसी भी तरह के गड्ढे की मांग किए जाने के मौखिक या लिखित आवेदन मिलने से इनकार किया। इससे साफ जाहिर होता है कि यहां पदस्थ कर्मचारी ने हमें सारी भ्रामक जानकारियां दी थी।

उप स्वास्थ्य केंद्र में भवन के पीछे खतरनाक अपशिष्ट

उप स्वास्थ्य केंद्र के परिसर के अंदर ही भवन के पीछे यहां से निकला अपशिष्ट पदार्थ हमें दिखाई दिया इसमें इसी केंद्र में उपयोग किया गया सिरिंज, कांच के छोटे फूटे एमपुल एवं वायल, दवाई की शीशियां, खून लगीं बोतलें और इंजेक्शन आदि थे। इसे भवन के पीछे छुपा कर जलाने की असफल कोशिश की गई थी, क्योंकि अधिकांश चीजें खुले में बेतरतीब फैली हुई थी। 
प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन कानून के नियम अनुसार चार विभिन्न रंगों के डस्टबिन होने चाहिए जिनमें अलग-अलग प्रकार के अपशिष्ट को वर्गीकृत करके सही तरीके से निपटान किया जाना चाहिए। मगर इस मॉडल उप स्वास्थ्य केंद्र में केवल तीन ही रंगों के डस्टबिन पाए गए। 

बस्तर विकासखंड के प्रशासनिक अधिकारियों को इस विषय में हमारे द्वारा जानकारी दे दी गई है। अब देखना यह है कि "क्या प्रबंधन इसको लेकर गंभीरता से कार्य करेगी? उप स्वास्थ्य केंद्रों का उन्नयन करके उसे सिर्फ वेलनेस सेंटर या मॉडल उप स्वास्थ्य केंद्र बना तो दिया है, मगर रख रखाव के लिए जो सबसे मौलिक जरूरत वहां के अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर ध्यान देना चाहिए क्या इसके लिए कोई पहल की जाएगी?

(विज्ञापन और खबरों के लिए संपर्क करें : 6261667774)

No comments