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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लामबद्ध, परियोजना अधिकारी और सुपरवाइजर पर भ्रष्टाचार के आरोप, कलेक्टर कार्यालय पहुंच की शिकायत

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जगदलपुर  : बस्तर जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत आंगनबाड़ी संचालन में अनियमितताएं हो रही हैं। जिले के सैकड़ों आंगनबाड़ी कार्यक...

जगदलपुर : बस्तर जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत आंगनबाड़ी संचालन में अनियमितताएं हो रही हैं। जिले के सैकड़ों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं गरम भोजन और सुपोषण अभियान की सामग्री की राशि में भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि इन राशियों को गबन किया जा रहा है।



हमारे संवाददाता विमलेंदु झा से हुई चर्चा में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि बास्तानार की परियोजना अधिकारी उर्मिला खोपरागड़े और जगदलपुर शहरी क्षेत्र की परियोजना अधिकारी अर्चना सेमसन, सुपरवाइजर रिंकू पांडे, रेखा नाग, सुनीता रामटेके, नीता पांडे, जंबु सेठिया और बुदरी नाग के द्वारा एक ही स्थान पर कई वर्षों से ड्यूटी करते समय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं का शोषण किया गया है। उन्होंने बताया कि हड़ताल अवधि का मानदेय आज तक नहीं दिया गया है। साथ ही, ईंधन और स्टेशनरी के नाम पर निकाले जाने वाले फ्लेक्सी फंड की राशि में भी हेराफेरी कर गबन किया जाता है।


आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने आगे बताया कि जगदलपुर शहरी क्षेत्र की परियोजना अधिकारी अर्चना सैमसन और जगदलपुर ग्रामीण क्षेत्र की सुपरवाइजर रिंकू पांडे पर पहले भी कई गंभीर आरोप लग चुके हैं, और इनकी शिकायतें बड़े अधिकारियों तक पहुंची हैं। इसके बावजूद, कोई कार्रवाई नहीं की गई है। शिकायत करने वालों को डराना-धमकाना और जबरदस्ती हस्ताक्षर करवाकर मामले को दबा देना आम बात हो गई है। ये अधिकारी अपनी ऊंची पहुंच का हवाला देकर किसी भी कार्रवाई से बच जाते हैं, जिससे सवाल उठता है कि क्या भ्रष्ट अधिकारी इसी तरह भ्रष्टाचार फैलाते रहेंगे और उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। यह स्थिति छोटे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए बेहद परेशान करने वाली है, क्योंकि अधिकारी उन्हें काम से निकालने की धमकी देते रहते हैं।


वहीं दूसरी ओर, आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ता सहायिका संघ बस्तर के संरक्षक विपिन तिवारी ने बताया कि कलेक्टर को कार्यवाही के लिए ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि अगर न्याय नहीं मिला, तो सभी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

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