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बस्तर के युवाओं के भविष्य के लिए लोकसभा में सांसद महेश कश्यप की सशक्त आवाज़

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जगदलपुर (विमलेन्दु शेखर झा ) -: लोकसभा के प्रश्नकाल के दौरान बस्तर के सांसद महेश कश्यप ने बस्तर क्षेत्र के युवाओं के भविष्य से जुड़ा एक अत्...

जगदलपुर (विमलेन्दु शेखर झा ) -: लोकसभा के प्रश्नकाल के दौरान बस्तर के सांसद महेश कश्यप ने बस्तर क्षेत्र के युवाओं के भविष्य से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय सदन में प्रभावी रूप से उठाया। उन्होंने युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे से प्रश्न करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) जैसी राष्ट्र निर्माण से जुड़ी योजनाओं को बस्तर के दूरस्थ,वनांचल और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए,ताकि वहां के युवा भटकाव से बचकर मुख्यधारा में लौट सकें और देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।





सांसद महेश कश्यप ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं को अनुशासन,नेतृत्व,सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है,किंतु बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इन क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए,जिससे एनएसएस के माध्यम से स्थानीय युवाओं को शिक्षा,कौशल और स्वयंसेवा से जोड़ा जा सके।


इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय युवा कोर (एनवाईसी) योजना के क्रियान्वयन को लेकर भी केंद्र सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में वर्तमान में कार्यरत राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवकों की संख्या,उनके प्रशिक्षण, पर्यवेक्षण तथा निगरानी व्यवस्था से संबंधित विवरण मांगा। साथ ही इस योजना को और अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनाने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे ठोस कदमों की जानकारी भी सदन में मांगी।


सांसद कश्यप ने विशेष रूप से ओडिशा के भद्रक एवं बालासोर जिलों में राष्ट्रीय युवा कोर के स्वयंसेवकों की तैनाती,प्रशिक्षण, सहायता और कार्यक्रम गतिविधियों में वृद्धि के संबंध में भी जानकारी मांगी। इसके अतिरिक्त उन्होंने ओडिशा के बालासोर लोकसभा क्षेत्र में वर्ष 2020 से अब तक विभिन्न विभागों द्वारा कौशल विकास हेतु स्वीकृत एवं उपयोग की गई धनराशि का वर्षवार विवरण प्रस्तुत करने की मांग की, जिससे योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके और उनके वास्तविक प्रभाव का मूल्यांकन हो सके।

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