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बस्तर में बदलाव की नई तस्वीर: कलेक्टर पैदल चलकर पहुँचे सुदूर ‘पैरी पखना’, ग्रामीणों से सीधा संवाद

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जगदलपुर (विमलेंदु शेखर झा ): कभी नक्सली दहशत के कारण प्रशासनिक पहुंच से दूर और दुर्गम माने जाने वाले बस्तर के गांव अब बदलाव की नई कहानी लिख ...

जगदलपुर (विमलेंदु शेखर झा):

कभी नक्सली दहशत के कारण प्रशासनिक पहुंच से दूर और दुर्गम माने जाने वाले बस्तर के गांव अब बदलाव की नई कहानी लिख रहे हैं। इसी बदलाव की एक सशक्त तस्वीर तब देखने को मिली, जब बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा खुद कठिन रास्तों को पार कर सुदूर ग्राम ‘पैरी पखना’ पहुँचे और ग्रामीणों से सीधे संवाद किया।

दरभा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत करका के आश्रित ग्राम पैरी पखना में पहली बार कलेक्टर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में जन-चौपाल का आयोजन किया गया। यह गांव लंबे समय तक नक्सल प्रभाव के कारण प्रशासनिक गतिविधियों से दूर रहा था, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं।

कलेक्टर छिकारा ने अपने संकल्प को निभाते हुए पहले चारपहिया वाहन, फिर मोटरसाइकिल और अंत में पैदल सफर तय कर गांव तक पहुंच बनाई। उनका स्पष्ट उद्देश्य था कि शासन की योजनाओं का लाभ उन अंतिम छोर के लोगों तक पहुंचे, जो वर्षों से मुख्यधारा से कटे रहे हैं।

जन-चौपाल के दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। ग्रामीणों ने पानी, सड़क, स्वास्थ्य सेवाओं और राशन वितरण से जुड़ी अपनी प्रमुख समस्याएं रखीं। कलेक्टर ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए, जिससे ग्रामीणों में भरोसा और उत्साह दोनों देखने को मिला।

कलेक्टर आकाश छिकारा ने इस अवसर पर कहा कि राज्य शासन की मंशा स्पष्ट है बस्तर को नक्सलवाद से मुक्त कर विकास की मुख्यधारा से जोड़ना। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे नक्सल प्रभाव कम हो रहा है, प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाए। ग्रामीणों ने वर्षों बाद प्रशासन को अपने बीच पाकर खुशी जाहिर की और इस पहल को ऐतिहासिक बताया।

बदलते बस्तर की यह पहल न केवल प्रशासनिक सक्रियता का उदाहरण है, बल्कि यह संकेत भी देती है कि अब विकास की रोशनी उन दूरस्थ अंचलों तक भी पहुंच रही है, जो लंबे समय तक उपेक्षित रहे।

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