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शौर्य दिवस पर गूंजा वीरता का संदेश, 212 बटालियन एटापक्का में हुआ भव्य आयोजन

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एटापक्का(विमलेंदु शेखर झा): । केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 212वीं बटालियन मुख्यालय एटापक्का में 9 अप्रैल 2026 को शौर्य दिवस बड़े ह...

एटापक्का(विमलेंदु शेखर झा):। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 212वीं बटालियन मुख्यालय एटापक्का में 9 अप्रैल 2026 को शौर्य दिवस बड़े ही गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर अधिकारियों एवं जवानों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

कार्यक्रम के दौरान द्वितीय कमान अधिकारी सह कमांडेंट श्री दिनेश कुमार ने शौर्य दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 9 अप्रैल 1965 को सीआरपीएफ की दूसरी वाहिनी की चार कंपनियों ने पाकिस्तान की इन्फेंट्री ब्रिगेड के सुनियोजित हमले का साहसपूर्वक मुकाबला किया था। भारतीय सीमा चौकियों ‘सरदार’ और ‘टाक’ पर हुए इस हमले को जवानों ने अदम्य साहस और रणनीति से विफल कर दिया।

उन्होंने बताया कि इस भीषण संघर्ष में पाकिस्तानी सेना के 34 जवान मारे गए और 4 को जीवित पकड़ लिया गया, जबकि सीआरपीएफ के 8 वीर जवान शहीद हुए और 19 जवानों को दुश्मन ने बंदी बना लिया था। इसके बावजूद भारतीय जवानों ने लगभग 12 घंटे तक दुश्मन को आगे बढ़ने से रोके रखा। यह घटना सैन्य इतिहास में अद्वितीय उदाहरण मानी जाती है, जहां अर्धसैनिक बल की एक छोटी टुकड़ी ने एक पूरी इन्फेंट्री ब्रिगेड के हमले को नाकाम कर दिया।

इस अवसर पर Police Medal for Gallantry (PMG) से सम्मानित जवान बल संख्या 041575346 हेड कांस्टेबल आर. मलिक शाहिद एवं बल संख्या 135278006 सिपाही जीडी पी. मारी राजू को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उनकी वीरता की गाथा उपस्थित सभी अधिकारियों और जवानों को सुनाई गई, जिससे पूरे परिसर में देशभक्ति और गर्व का माहौल बन गया।

कार्यक्रम के अंत में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ रंगारंग आयोजन किया गया तथा रात्रि में ‘बड़ा खाना’ का आयोजन कर सभी ने सामूहिक रूप से इस गौरवपूर्ण दिवस को यादगार बनाया। इस अवसर पर डॉ. सुमित सहगल (सीएमओ), उप कमांडेंट श्री अजय प्रताप सिंह सहित अन्य अधिकारी एवं जवान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। शौर्य दिवस का यह आयोजन न केवल वीर शहीदों की स्मृति को नमन करने का अवसर बना, बल्कि वर्तमान जवानों में देश सेवा, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की भावना को और अधिक प्रबल करने वाला साबित हुआ।

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