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नक्सल प्रभाव वाले इलाकों में बदली तस्वीर: अब ‘रासपरब’ के नुक्कड़ नाटकों से जंगल और वन्यजीव संरक्षण का संदेश

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जगदलपुर (विमलेंदु शेखर झा): बीजापुर जिले के अति संवेदनशील और कभी नक्सल प्रभाव वाले इलाकों से अब एक नई और सकारात्मक तस्वीर सामने आ रही है। जह...

जगदलपुर (विमलेंदु शेखर झा):

बीजापुर जिले के अति संवेदनशील और कभी नक्सल प्रभाव वाले इलाकों से अब एक नई और सकारात्मक तस्वीर सामने आ रही है। जहां पहले नक्सलियों की तथाकथित चेतना नाट्य मंडलियां लाल आतंक का प्रचार करती थीं, वहीं अब उन्हीं गांवों और हाट-बाजारों में सामाजिक जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश गूंज रहा है।

नक्सलवाद के प्रभाव में कमी के बाद इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में “रासपरब” सांस्कृतिक संस्था द्वारा नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से ग्रामीणों को वन और वन्य प्राणियों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। यह अभियान जंगलों को आग से बचाने, जैव विविधता के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझाने पर केंद्रित है।

संस्था के निर्माता-निर्देशक आशुतोष प्रसाद और राकेश यादव के नेतृत्व में कलाकारों की टीम ने भोपालपटनम, भैरमगढ़, कुटरू, फरसेगढ़, तोयनार सहित दर्जनों गांवों और हाट बाजारों में प्रस्तुतियां दीं। खास बात यह रही कि जिन स्थानों पर 20-25 वर्षों बाद बाजार फिर से शुरू हुए हैं, वहां इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम पहली बार आयोजित हुए।

नाटकों के माध्यम से ग्रामीणों को बताया गया कि जंगलों में आग लगाना न केवल अपराध है, बल्कि इससे पर्यावरणीय असंतुलन, जल संकट और भूमि क्षरण जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं। महुआ बीनने के दौरान आग न लगाने, तेंदूपत्ता तोड़ाई में सावधानी बरतने और वन्य प्राणियों का शिकार न करने की अपील भी की गई।

कार्यक्रमों में हिंदी के साथ-साथ हल्बी, गोंडी और तेलुगु भाषाओं का उपयोग कर स्थानीय लोगों से जुड़ने की प्रभावी कोशिश की गई। ग्रामीणों ने भी बड़ी संख्या में इन आयोजनों में भाग लेकर न केवल रुचि दिखाई, बल्कि कलाकारों के प्रयासों की सराहना की।

यह अभियान छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की मंशा के अनुरूप चलाया जा रहा है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण पांडे, क्षेत्रीय निदेशक इंद्रावती टाइगर रिजर्व स्टाइलो मंडावी और उप निदेशक संदीप बलगा के मार्गदर्शन में यह पहल धरातल पर सफलतापूर्वक लागू की जा रही है।

रासपरब के कलाकार सविता रामटेक, उर्वशी कश्यप, रुक्मणि साहू, जानवी निषाद, सागर बघेल, लकी नारायण, पारेश्वर ठाकुर और मनमोहन यादव ने अपनी जीवंत प्रस्तुतियों से न सिर्फ मनोरंजन किया, बल्कि ग्रामीणों के बीच पर्यावरण संरक्षण का गहरा संदेश भी पहुंचाया।

बीजापुर के जंगलों में अब डर नहीं, जागरूकता और उम्मीद की नई कहानी लिखी जा रही है। जहां कभी बंदूक की आवाज गूंजती थी, वहां अब संस्कृति, संवाद और संरक्षण का संदेश सुनाई दे रहा है।

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