भानुप्रतापपुर: तहसील दुर्गूकोंदल अंतर्गत ग्राम पंचायत परेंकोडो में प्रस्तावित गोदावरी माइंस के “वेस्ट डंपिंग” प्रोजेक्ट को लेकर नया विवाद ख...
भानुप्रतापपुर: तहसील दुर्गूकोंदल अंतर्गत ग्राम पंचायत परेंकोडो में प्रस्तावित गोदावरी माइंस के “वेस्ट डंपिंग” प्रोजेक्ट को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। शिवसेना पार्टी के प्रदेश महासचिव चंद्रमौली मिश्रा ने पूर्व वन मंडल भानुप्रतापपुर के डीएफओ को शिकायती पत्र सौंपकर वृक्ष गणना में भारी अनियमितता और कंपनी को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से नियमों की अनदेखी किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है।
शिकायत पत्र में कहा गया है कि ग्राम पंचायत परेंकोडो के खसरा क्रमांक 188/1, 247/1 एवं 247/2 की कुल 60.84 हेक्टेयर भूमि को गोदावरी माइंस द्वारा वेस्ट डंपिंग के लिए उपयोग में लाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए वन एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा हाल ही में वृक्ष गणना सर्वे किया गया, लेकिन शिवसेना ने इस पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
खसरों की अवैध क्लबिंग का आरोप:
शिवसेना नेता चंद्रमौली मिश्रा ने आरोप लगाया कि सर्वे टीम ने तीनों अलग-अलग खसरों को एक साथ जोड़कर एकमुश्त वृक्ष गणना रिपोर्ट तैयार कर दी, जबकि नियमानुसार प्रत्येक खसरे का अलग-अलग सर्वे और रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए थी। उनका कहना है कि ऐसा कर अधिक घनत्व वाले वन क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को छिपाने का प्रयास किया गया है।
शिकायत में दावा किया गया है कि प्रस्तावित क्षेत्र में लगभग 11,984 वृक्ष मौजूद हैं, जो इस इलाके को पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील बनाता है। शिवसेना का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की मौजूदगी के बावजूद क्षेत्र को “पहाड़ चट्टान” बताकर वास्तविक स्थिति छुपाई जा रही है।
शिवसेना ने अपने पत्र में टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुलपाद बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी भूमि को केवल राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर नहीं, बल्कि उसके वास्तविक भौतिक स्वरूप के आधार पर “डीम्ड फॉरेस्ट” माना जाना चाहिए। आरोप है कि सर्वे रिपोर्ट में कैनोपी घनत्व और वनस्पति विश्लेषण जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया।
शिवसेना ने चेतावनी दी है कि यदि उक्त क्षेत्र में वेस्ट डंपिंग की अनुमति दी गई, तो आसपास की कृषि भूमि, जल स्रोत और स्थानीय वन्यजीवों पर गंभीर असर पड़ेगा। संगठन का कहना है कि यह परियोजना पूरे क्षेत्र की पारिस्थितिकी के लिए खतरा बन सकती है।
7 दिन का अल्टीमेटम, NGT जाने की चेतावनी
शिवसेना ने विभाग से मांग की है कि वर्तमान वृक्ष गणना रिपोर्ट को तत्काल निरस्त कर वैज्ञानिक पद्धति से निष्पक्ष दोबारा सर्वे कराया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि 7 दिनों के भीतर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल सहित अन्य सक्षम न्यायिक मंचों का दरवाजा खटखटाएगा।


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