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बादल संस्था के समर कैंप ने बच्चों को जोड़ा कला, संस्कृति और लोकभाषा से

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जगदलपुर विमलेंदु शेखर झा: आज के डिजिटल युग में जहां बच्चों का अधिकांश समय मोबाइल और स्क्रीन के बीच बीत रहा है, वहीं बस्तर एकेडमी ऑफ डांस आर्...

जगदलपुर विमलेंदु शेखर झा:

आज के डिजिटल युग में जहां बच्चों का अधिकांश समय मोबाइल और स्क्रीन के बीच बीत रहा है, वहीं बस्तर एकेडमी ऑफ डांस आर्ट एंड लिटरेचर (बादल), आसना द्वारा आयोजित 30 दिवसीय समर कैंप बच्चों के लिए रचनात्मकता, संस्कृति और सीख का अनूठा मंच साबित हुआ।

एक मई से 30 मई तक चले इस शिविर में बच्चों को केवल नृत्य और संगीत ही नहीं, बल्कि चित्रकला, हस्तकला, नाटक, वादन और स्थानीय भाषाओं का भी प्रशिक्षण दिया गया। समापन समारोह में बच्चों ने मंच पर अपनी सीखी हुई कला का प्रदर्शन कर सभी को प्रभावित किया।

देशभक्ति गीतों से लेकर बस्तर के पारंपरिक परब गीतों तक, गुरु वंदना से लेकर कालबेलिया नृत्य तक, हर प्रस्तुति में बच्चों का आत्मविश्वास और प्रतिभा स्पष्ट दिखाई दी। विशेष रूप से हल्बी और गोंडी भाषा के प्रशिक्षण ने इस शिविर को अन्य समर कैंपों से अलग पहचान दी।

कार्यक्रम में लगी हस्तकला और चित्रकला प्रदर्शनी ने यह साबित किया कि बच्चों को उचित अवसर और मार्गदर्शन मिले तो उनकी रचनात्मक क्षमता नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है।

समापन समारोह में उपस्थित अतिथियों ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को ग्रामीण क्षेत्रों में सांस्कृतिक संरक्षण और प्रतिभा विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।

बादल संस्था का यह प्रयास न केवल बच्चों की प्रतिभा को निखारने वाला रहा, बल्कि बस्तर की लोकसंस्कृति, परंपराओं और भाषाई विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सार्थक अभियान भी साबित हुआ।

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