मां दंतेश्वरी मंदिर में की पूजा-अर्चना, संस्कृति के संरक्षण और बच्चों की शिक्षा को बताया समाज की प्रगति का आधार जगदलपुर (विमलेंदु शेखर झा) :...
मां दंतेश्वरी मंदिर में की पूजा-अर्चना, संस्कृति के संरक्षण और बच्चों की शिक्षा को बताया समाज की प्रगति का आधार
जगदलपुर (विमलेंदु शेखर झा) : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शुक्रवार को बस्तर प्रवास पर जगदलपुर पहुंचीं। अपने दौरे के दौरान उन्होंने मां दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद वे बस्तर दशहरा के ऐतिहासिक मुरिया दरबार में शामिल हुईं, जहां उन्होंने जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों से संवाद किया। राष्ट्रपति के आगमन से बस्तर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली।
बस्तर दशहरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की सदियों पुरानी परंपराओं, सामाजिक व्यवस्था और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का जीवंत प्रतीक है। मुरिया दरबार इसी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां मांझी-चालकी सहित जनजातीय समाज के प्रतिनिधि अपनी बात रखते हैं और क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं। राष्ट्रपति की उपस्थिति ने इस पारंपरिक आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया।
संस्कृति के संरक्षण के साथ शिक्षा पर जोर:
जनजातीय प्रतिनिधियों से संवाद के दौरान राष्ट्रपति ने बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने समाज से अपनी विशिष्ट पहचान और परंपराओं को संरक्षित रखने के साथ-साथ शिक्षा को प्राथमिकता देने का संदेश दिया। बच्चों को शिक्षित करने और उन्हें बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
राष्ट्रपति के संदेश में परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन की अहमियत सामने आई। सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए शिक्षा, जागरूकता और विकास की दिशा में आगे बढ़ना जनजातीय समाज की भावी प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने सामाजिक एकता, आपसी सद्भाव और प्रकृति के संरक्षण जैसे मूल्यों की प्रासंगिकता को भी रेखांकित किया।
राष्ट्रीय मंच पर बस्तर की सांस्कृतिक पहचान:
बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं और जनजातीय सहभागिता के लिए देशभर में अलग पहचान रखता है। इस उत्सव के दौरान आयोजित मुरिया दरबार स्थानीय समाज और पारंपरिक नेतृत्व के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच है। राष्ट्रपति का इस आयोजन में शामिल होना बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं के महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्रपति के बस्तर प्रवास ने एक बार फिर यह रेखांकित किया कि क्षेत्र की वास्तविक पहचान उसकी समृद्ध लोक-संस्कृति, सामुदायिक परंपराओं और प्रकृति के साथ उसके गहरे संबंधों में निहित है। परंपराओं के संरक्षण के साथ शिक्षा और विकास को आगे बढ़ाने का संदेश बस्तर के सामाजिक भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।




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