मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार की पहल: होमस्टे, ग्रामीण पर्यटन और चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार पर जोर रायपुर, 10 अक्टूबर 2026। छत...
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार की पहल: होमस्टे, ग्रामीण पर्यटन और चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार पर जोर
रायपुर, 10 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली को पर्यटन से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार पहल कर रही है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने, जनजातीय क्षेत्रों में होमस्टे को बढ़ावा देने और ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में योगदान देने वालों को सम्मानित करने के लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ शुरू करने जैसी पहलें इस दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
जनसंपर्क विभाग के संयुक्त संचालक धनंजय राठौर के इस विशेष लेख के अनुसार, इन प्रयासों का उद्देश्य गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ स्थानीय संस्कृति तथा प्राकृतिक विरासत का संरक्षण करना है।
बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और संस्कृति बनेगी पर्यटन की ताकत:
बस्तर अपने घने जंगलों, पहाड़ों, जलप्रपातों, जनजातीय परंपराओं और लोककलाओं के लिए जाना जाता है। यहां का विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा भी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाला यह आयोजन अपनी अनूठी परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता के लिए विशेष पहचान रखता है।
बस्तर के साथ सरगुजा और राज्य के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्राकृतिक स्थलों, पारंपरिक खान-पान, हस्तशिल्प और स्थानीय जीवनशैली को पर्यटन से जोड़ने की संभावनाएं हैं।
चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार से स्थानीय प्रतिभाओं को पहचान:
बस्तर के चेन्दरू मंडावी ‘टाइगर बॉय’ के नाम से प्रसिद्ध हुए थे। बाघ ‘टेंबू’ के साथ उनकी दोस्ती और स्वीडिश फिल्म ‘जंगल सागा’ से उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली थी।
चेन्दरू की स्मृति में शुरू किए गए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ का उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन, लोककला, हस्तशिल्प और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण में योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रोत्साहित करना है।
इस पुरस्कार के तहत एक लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र देने का प्रावधान बताया गया है। चयन छह सदस्यीय ज्यूरी द्वारा किए जाने और विजेताओं को राज्योत्सव में सम्मानित करने की व्यवस्था भी लेख में उल्लेखित है।
होमस्टे नीति से ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय:
‘छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30’ के माध्यम से ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के परिवार अपने घरों में पर्यटकों के ठहरने की सुविधा विकसित कर सकते हैं। इससे परिवारों को अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा और पर्यटक गांवों की संस्कृति तथा जीवनशैली को करीब से जान सकेंगे।
होमस्टे में स्थानीय भोजन, पारंपरिक रहन-सहन, लोककला और हस्तशिल्प को पर्यटन अनुभव का हिस्सा बनाया जा सकता है। नीति में नए होमस्टे की स्थापना और मौजूदा मकानों के उन्नयन के लिए वित्तीय सहायता तथा संचालकों को प्रशिक्षण देने जैसे प्रावधानों का उल्लेख है।
इस व्यवस्था से महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों, ग्रामीण परिवारों और छोटे उद्यमियों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
पर्यटन को उद्योग का दर्जा, निवेश को प्रोत्साहन:
राज्य की औद्योगिक नीति 2024-30 में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है। इसका उद्देश्य पर्यटन परियोजनाओं को प्रोत्साहन देना और इस क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को बढ़ाना है।
सड़क संपर्क, आवासीय सुविधाओं, परिवहन और पर्यटक सेवाओं का विकास होने से नए पर्यटन स्थलों को पहचान मिल सकती है। होटल, होमस्टे, स्थानीय खान-पान और गाइड सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
लेख के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया है कि इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड ने छत्तीसगढ़ में निवेश की इच्छा जताई है। ऐसे निवेश से पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
गांव का युवा बनेगा पर्यटन उद्यमी:
ग्रामीण पर्यटन के विस्तार से युवाओं के लिए होमस्टे संचालन, टूर गाइडिंग, इको-टूरिज्म, हस्तशिल्प और डिजिटल मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बन सकते हैं। इसके लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया को सरल बनाना अहम होगा।
छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा और जनजातीय संस्कृति को जिम्मेदार पर्यटन से जोड़कर गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सकती है। स्थानीय समुदायों की भागीदारी और पर्यावरण संरक्षण के साथ इन पहलों का प्रभावी क्रियान्वयन ग्रामीण पर्यटन को राज्य के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बना सकता है।





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