जगदलपुर/नागपुर: नागपुर में आयोजित “वामा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव 2026” में देश-विदेश की सशक्त महिलाओं और ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों ...
जगदलपुर/नागपुर: नागपुर में आयोजित “वामा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव 2026” में देश-विदेश की सशक्त महिलाओं और ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति देखने को मिली। साहित्यिक संस्था वामा विमर्श मंच द्वारा आयोजित इस भव्य महोत्सव में स्त्री सशक्तिकरण, साहित्य और सामाजिक बदलाव पर गहन विमर्श हुआ।
चितनविस सेंटर, नागपुर में आयोजित इस कार्यक्रम ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नया इतिहास रचते हुए समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रही महिलाओं को मंच प्रदान किया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन तथा महिला कमांडो प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीण विकास में योगदान देने वाली शमशाद बेगम ने अपने अनुभव साझा किए। दोनों ही वक्ताओं ने अपने कार्यों से उपस्थित जनसमूह को प्रेरित किया, जिससे सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं सीए श्वेताली ठाकरे ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश देते हुए बैंकिंग और एसआईपी योजना की जानकारी दी। वहीं अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कवयित्री डॉ. कीर्ति काले ने अपनी प्रस्तुति “ये हैं कॉन्फिडेंट लड़कियाँ” के माध्यम से आत्मविश्वास और नारी शक्ति का प्रभावशाली चित्रण किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
महोत्सव में सिंगापुर से आईं कवयित्री नीतू गुजराल की रचनाओं ने श्रोताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ते हुए बचपन की यादें ताजा कर दीं।
इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग, विशेषकर जगदलपुर की चार महिला प्रतिभाओं करमजीत कौर, डॉ. पूर्णिमा सरोज, कविता बिजौलिया एवं गायत्री आचार्य ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। इन सभी को वामा संस्था की ओर से शॉल और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया।
लघुकथा सत्र में करमजीत कौर और डॉ. पूर्णिमा सरोज ने अपनी प्रभावशाली लघुकथाओं का पाठ किया, जिसे साहित्यकारों और श्रोताओं ने सराहा। वहीं इस सत्र का सफल संचालन कविता बिजौलिया ने किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने आयोजन के लिए वामा संस्था की अध्यक्ष रीमा दीवान चड्ढा एवं पूरी आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया। जगदलपुर की इन महिला साहित्यकारों की उपलब्धि पर क्षेत्र के साहित्यकारों, मित्रों और परिजनों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
यह आयोजन न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के संदेश को भी प्रभावी ढंग से समाज तक पहुंचाने में सफल रहा।


No comments