जगदलपुर(विमलेंदु शेखर झा): बस्तर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार बिगड़ती नजर आ रही है। सरकारी अस्पतालों में जहां पहले से ही संस...
जगदलपुर(विमलेंदु शेखर झा): बस्तर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार बिगड़ती नजर आ रही है। सरकारी अस्पतालों में जहां पहले से ही संसाधनों की कमी की शिकायतें थीं, वहीं अब सामान्य और आवश्यक दवाइयों का अभाव भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि मरीजों को मामूली बीमारियों के इलाज के लिए भी निजी मेडिकल दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
इसी मुद्दे को लेकर भुवनेश्वर कश्यप, उपाध्यक्ष, बस्तर जिला छत्तीसगढ़ मीडिया एसोसिएशन महासंघ ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली अब आम लोगों के लिए रोजमर्रा की समस्या बन चुकी है, जो प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है।
कश्यप ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे एक सामान्य दवा लेने सरकारी अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन वहां clotrimazole, betamethasone & neomycin क्रीम जैसी साधारण दवा भी उपलब्ध नहीं थी। यह दवा आमतौर पर त्वचा संबंधी समस्याओं के उपचार में उपयोग की जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतनी बुनियादी दवाइयां भी अस्पतालों में नहीं मिल पा रही हैं, तो गंभीर बीमारियों के इलाज की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का अनुभव नहीं, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र की वास्तविकता है। दवाइयों की कमी के कारण कई मरीजों को इलाज बीच में छोड़ना पड़ता है या मजबूरी में महंगी दवाइयां बाजार से खरीदनी पड़ती हैं।
कश्यप ने सरकार के दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावे जमीनी स्तर पर पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। अस्पतालों में न तो पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध हैं और न ही सुविधाओं का समुचित प्रबंधन।
उन्होंने प्रशासन से जवाब मांगते हुए कहा कि जब सरकार बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं करा पा रही है, तो आम जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा। स्वास्थ्य जैसी जरूरी सेवा में इस तरह की लापरवाही बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।
सुधार की मांग
अंत में कश्यप ने सरकार से मांग की है कि बस्तर जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी निगरानी हो और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम नागरिकों को सुलभ और बेहतर इलाज मिल सके।


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