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विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘हम बस्तरिया बस्तीदार’ की अनूठी पहल, पुराने पेड़ों और दलपत सागर को बचाने का लिया संकल्प

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जगदलपुर(विमलेंदु शेखर झा): विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नगर के जागरूक नागरिकों ने प्रकृति, हरियाली और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए ...

जगदलपुर(विमलेंदु शेखर झा):

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नगर के जागरूक नागरिकों ने प्रकृति, हरियाली और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए ऐतिहासिक दलपत सागर से एक विशेष जनजागरण अभियान की शुरुआत की। गैर-राजनीतिक नागरिक समूह ‘हम बस्तरिया बस्तीदार’ के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने पुराने वृक्षों और जल स्रोतों को बचाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के दौरान दलपत सागर की मेड़ पर खड़े पुराने वृक्षों के संरक्षण का संदेश दिया गया। सूखते हुए तालाब और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत करते हुए एक पुराने सूखे वृक्ष पर हरिद्रालेपन किया गया। इसके साथ ही उपस्थित नागरिकों ने ‘रुख किरिया’ अर्थात पेड़ों की रक्षा करने की शपथ ली तथा वृक्षों को रक्षा सूत्र बांधकर उनके संरक्षण का संदेश दिया।

इस अवसर पर साहित्यकार हिमांशु शेखर झा ने कहा कि वृक्ष मानव जीवन के फेफड़े हैं और उनका संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक दलपत सागर धीरे-धीरे अपनी पहचान खोता जा रहा है, जो चिंता का विषय है। इसी तरह नगर के कई पुराने और ऐतिहासिक महत्व वाले वृक्ष भी कटाई की जद में हैं। ऐसे वृक्ष केवल पेड़ नहीं बल्कि हमारी जीवंत विरासत हैं, जिनके संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता आवश्यक है।

समूह के संयोजक सुभाष श्रीवास्तव ने बताया कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बस्तर की पहचान उसकी हरियाली, संस्कृति और प्राकृतिक विरासत है, जिसे सुरक्षित रखना सभी नागरिकों का दायित्व है।

कार्यक्रम में मनीराम कश्यप, भादूराम कश्यप सहित नगर के अनेक प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने बस्तर की हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।


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