30 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से होगी मुलाकात, बस्तर की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और बदलते स्वरूप से कराएंगे परिचित रायपुर/जगदलपुर...
30 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से होगी मुलाकात, बस्तर की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और बदलते स्वरूप से कराएंगे परिचित
रायपुर/जगदलपुर(विमलेंदु शेखर झा):
बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, सामाजिक परंपराओं और क्षेत्र में हो रहे बदलावों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने के उद्देश्य से 164 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को दिल्ली के लिए रवाना हुआ। प्रतिनिधिमंडल में परगना मांझी, चालाकी, समाज प्रमुख, बस्तर पंडुम-2026 के जनजातीय कलाकार, विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि तथा पद्मश्री सम्मान प्राप्त हस्तियां शामिल हैं। यह दल 30 जुलाई को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात करेगा।
प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति को बस्तर की गौरवशाली जनजातीय विरासत, लोक परंपराओं, सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक विविधता से अवगत कराएगा। साथ ही यह संदेश भी देगा कि बस्तर अब शांति, विकास और जनभागीदारी के नए दौर की ओर बढ़ रहा है।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्य राष्ट्रपति के समक्ष यह भी रखेंगे कि शासन की विकासोन्मुखी योजनाओं तथा सुरक्षा बलों के प्रयासों से क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। उनका कहना है कि इन परिवर्तनों के कारण शिक्षा, पर्यटन, रोजगार और जनजीवन में नई संभावनाएं विकसित हुई हैं तथा बस्तर के युवा अपनी प्रतिभा और संस्कृति के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रहे हैं।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दल केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं का प्रतिनिधित्व करेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन तक बस्तर की लोकसंस्कृति, रीति-रिवाज और सामाजिक मूल्यों की गूंज पहुंचना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।
उन्होंने कहा कि कभी नक्सलवाद की चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाला बस्तर आज शांति, विकास, शिक्षा, पर्यटन, खेल और सांस्कृतिक चेतना के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। राष्ट्रपति से यह मुलाकात देश के समक्ष बस्तर की सकारात्मक छवि और यहां के सामाजिक-सांस्कृतिक वैभव को प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर होगी।



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