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बस्तर की डॉ. पूर्णिमा सरोज को मिला ‘लोकधरा गौरव सम्मान 2026’

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लोक कला और लोकसंस्कृति के संरक्षण में योगदान के लिए प्रदेश स्तरीय सम्मान रायपुर। बस्तर जिले की लोक कला एवं लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्...

लोक कला और लोकसंस्कृति के संरक्षण में योगदान के लिए प्रदेश स्तरीय सम्मान

रायपुर। बस्तर जिले की लोक कला एवं लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय डॉ. पूर्णिमा सरोज को ‘लोकधरा गौरव सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक कलाकार कल्याण संघ द्वारा रविवार को रायपुर के महामाया मंदिर सत्संग भवन, पुरानी बस्ती में आयोजित वार्षिक प्रदेश स्तरीय लोक कला अलंकरण समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ शासन की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने दीप प्रज्वलित कर किया। समारोह में छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री विशेषर सिंह पटेल विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

डॉ. पूर्णिमा सरोज वर्तमान में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धनपुंजी में प्राचार्य के पद पर कार्यरत हैं। लोक कला और लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए उनके लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों को देखते हुए उन्हें ‘लोक साधक सम्मान-लोकधरा गौरव सम्मान 2026’ से अलंकृत किया गया।

सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. सरोज ने संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री गुरुदास मानिकपुरी एवं जिला अध्यक्ष डॉ. मिनेश कुमार पाणिग्रही के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर बस्तर के लोक कलाकारों को सम्मानित करने का यह सराहनीय प्रयास है। बस्तर की माटी लोक कला और कलाकारों की समृद्ध परंपरा से भरी हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में बस्तर के कलाकार राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मानित होंगे।

समारोह में बस्तर जिले के कुल 10 कलाकारों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। इनमें श्रीमती सुमन लता कोसले, श्री बुदरू राम नाग, श्री ईमानियल राणा, कु. प्रियंका यादव, श्री महेन्द्र सिंह ठाकुर, श्री रैनू राम नाग, कु. अंजली नाग, श्री गुड्डू नाग और श्री लुभान पाणिग्रही सहित अन्य कलाकार शामिल रहे।

कार्यक्रम में संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री रमेश गुप्ता, प्रदेश सचिव श्री हृदय अनंत सहित प्रदेशभर के जिला अध्यक्ष और अनेक नामचीन लोक कलाकार उपस्थित रहे। बस्तर के कलाकारों को प्रदेश स्तर पर मिले सम्मान पर कला प्रेमियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र की लोक कला परंपरा के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।

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