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स्वास्थ्य मंत्री के निरीक्षण के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्थाएं, महारानी अस्पताल व मेडिकल कॉलेज डिमरापाल पर उठे सवाल

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जगदलपुर। स्वास्थ्य मंत्री के हालिया निरीक्षण के बाद भी महारानी अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज डिमरापाल की स्वास्थ्य सेवाओं में अपेक्षित सुधार नही...

जगदलपुर। स्वास्थ्य मंत्री के हालिया निरीक्षण के बाद भी महारानी अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज डिमरापाल की स्वास्थ्य सेवाओं में अपेक्षित सुधार नहीं होने का आरोप लगाते हुए बस्तर जिला इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष भुवनेश्वर कश्यप ने कहा कि केवल औचक निरीक्षण, घोषणाएं और फोटो सेशन से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार संभव नहीं है। उन्होंने अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने, पंजीयन काउंटरों की संख्या बढ़ाने, ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था को प्रभावी बनाने तथा समय पर जांच, दवा और उपचार सुनिश्चित करने की मांग की। कश्यप ने अस्पतालों की जमीनी स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है।

भुवनेश्वर कश्यप ने कहा कि महारानी अस्पताल के ओपीडी पंजीयन काउंटर पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज, बुजुर्ग, महिलाएं और दूर-दराज़ से आने वाले ग्रामीण घंटों तक लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं। ऑनलाइन टोकन और पर्ची व्यवस्था सुचारू नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों को भी समय पर पंजीयन नहीं मिल पाता, जिससे उपचार में देरी होती है।

उन्होंने मेडिकल कॉलेज डिमरापाल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, जांच सुविधाओं, दवाइयों और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक विभाग से दूसरे विभाग तक भटकने की वजह से मरीजों और उनके परिजनों का समय और आर्थिक संसाधन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

कश्यप ने कहा कि केवल औचक निरीक्षण, घोषणाएं और फोटो सेशन से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार संभव नहीं है। उन्होंने अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने, पंजीयन काउंटरों की संख्या बढ़ाने, ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था को प्रभावी बनाने तथा समय पर जांच, दवा और उपचार सुनिश्चित करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि महारानी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज डिमरापाल बस्तर संभाग के लाखों लोगों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान हैं। ऐसे में इन अस्पतालों की व्यवस्थाओं में सुधार का लाभ आम मरीजों तक वास्तविक रूप से पहुंचना चाहिए।

संघर्ष समिति ने शासन और स्वास्थ्य विभाग से अस्पतालों की कमियों को समयबद्ध तरीके से दूर करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सुधार नहीं किया गया तो जनहित में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा।

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