जगदलपुर/रायपुर(विमलेंदु शेखर झा): छत्तीसगढ़ में क्रमोन्नत वेतनमान और समयमान वेतनमान के बीच विकल्प चयन को लेकर शिक्षा विभाग के शिक्षकों में...
जगदलपुर/रायपुर(विमलेंदु शेखर झा):
छत्तीसगढ़ में क्रमोन्नत वेतनमान और समयमान वेतनमान के बीच विकल्प चयन को लेकर शिक्षा विभाग के शिक्षकों में उत्पन्न असमंजस के बीच छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने राज्य शासन का ध्यान इस गंभीर विषय की ओर आकर्षित किया है। फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी ने मुख्य सचिव को विस्तृत पत्र भेजकर विभिन्न तकनीकी एवं प्रशासनिक विसंगतियों की जानकारी देते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने और विकल्प प्रस्तुत करने की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है।
फेडरेशन ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 9 जून 2026 को जारी आदेश के अनुसार 31 मार्च 2026 तक नियुक्त शासकीय कर्मचारियों को क्रमोन्नत वेतनमान अथवा समयमान वेतनमान में से किसी एक लाभप्रद योजना का चयन एक माह के भीतर करना है। लेकिन शिक्षा विभाग के कई संवर्गों, विशेषकर सहायक शिक्षक वर्ग के संबंध में समयमान वेतनमान का पूर्ण प्रावधान अभी तक वित्त विभाग द्वारा स्वीकृत नहीं किया गया है।
पत्र में बताया गया है कि आदेश के परिशिष्ट-2 में सहायक शिक्षक पद का समुचित समावेश नहीं होने के कारण उनके लिए त्रिस्तरीय समयमान वेतनमान की स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में वास्तविक तुलनात्मक लाभ जाने बिना किसी एक विकल्प का चयन करना शिक्षकों के हित में नहीं माना जा सकता।
फेडरेशन ने यह भी बताया कि सहायक शिक्षक संवर्ग को त्रिस्तरीय समयमान वेतनमान का लाभ देने की मांग लंबे समय से की जा रही है। इस संबंध में राज्य शासन को कई ज्ञापन दिए जा चुके हैं तथा 29 मई 2026 को पुनः स्मरण-पत्र भी सौंपा गया है।
राजेश चटर्जी ने पत्र में विकल्प पत्र की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विकल्प पत्र में संविलियन संबंधी जानकारी दर्ज करने का कोई प्रावधान नहीं है, जबकि कई शिक्षकों की सेवा स्थिति इससे प्रभावित होती है। इसके अलावा यदि कोई शिक्षक बाद में पदोन्नत होता है तो पहले चुना गया विकल्प अंतिम और अपरिवर्तनीय रहने की स्थिति भी अनेक शंकाएं उत्पन्न कर रही है।
फेडरेशन ने शिक्षा विभाग में वेतनमान संबंधी विसंगतियों का उदाहरण देते हुए बताया कि सीमित परीक्षा से चयनित प्राथमिक शाला के प्रधानपाठकों को समयमान वेतनमान का लाभ दिया गया है, जबकि समान प्रक्रिया से चयनित पूर्व माध्यमिक शाला के प्रधानपाठकों को अब तक यह सुविधा नहीं मिली है। इस संबंध में लगातार अभ्यावेदन दिए जाने के बावजूद स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।
फेडरेशन का कहना है कि शिक्षा विभाग का कर्मचारी वर्ग अत्यंत व्यापक है और विभिन्न संवर्गों की सेवा शर्तें अलग-अलग हैं। ऐसे में बिना सभी विसंगतियों के समाधान और स्पष्ट दिशा-निर्देश के विकल्प भरवाना भविष्य में विवाद का कारण बन सकता है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने राज्य शासन से मांग की है कि सभी लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण किया जाए, सहायक शिक्षक संवर्ग के समयमान वेतनमान पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए तथा विकल्प पत्र जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए ताकि शिक्षक पूरी जानकारी के आधार पर अपने हित में उचित निर्णय ले सकें।


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