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बस्तर की लोक संस्कृति को मंच पर जीवंत करने 30 दिवसीय नाट्य कार्यशाला का शुभारंभ

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जगदलपुर(विमलेंदु शेखर झा):       राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (नई दिल्ली), बादल आसना, संस्कार भारती तथा एनएमडीसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित...

जगदलपुर(विमलेंदु शेखर झा):      राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (नई दिल्ली), बादल आसना, संस्कार भारती तथा एनएमडीसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 30 दिवसीय प्रस्तुतिपरक नाट्य कार्यशाला का शुभारंभ रविवार को बादल आसना में हुआ। यह कार्यशाला 11 जुलाई से 9 अगस्त 2026 तक आयोजित की जाएगी, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश और दिल्ली के लगभग 30 प्रशिक्षार्थी भाग ले रहे हैं।
कार्यशाला का उद्घाटन सहायक कलेक्टर (आईएएस) यशवंत नायक के मुख्य आतिथ्य में हुआ। विशिष्ट अतिथि के रूप में संस्कार भारती के मध्य क्षेत्र प्रमुख अनिल जोशी, संस्कार भारती बस्तर के संरक्षक सुबीर नंदी तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से आए वरिष्ठ नाट्य निर्देशक भुनेश्वर महिलाने उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संस्कार भारती के मंचीय कला विभाग के प्रांत संयोजक आनंद पांडेय एवं प्रांत मंत्री रिजेंद्र गंजीर की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ दंतेश्वरी एवं भगवान नटराज के छायाचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन संस्कार भारती बस्तर के अध्यक्ष जैनेन्द्र सिंह ने दिया।
मुख्य प्रशिक्षक भुनेश्वर महिलाने ने कहा कि 30 दिनों के प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को अभिनय, मंच संचालन, प्रस्तुति, चरित्र निर्माण सहित नाट्य कला के विभिन्न आयामों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बस्तर के युवाओं से इस अवसर का लाभ उठाकर अपनी अभिनय प्रतिभा को निखारने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि यशवंत नायक ने अपने संबोधन में कहा कि बस्तर की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का प्रभावी मंचन नाट्य कला के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया के जरिए अपनी कला और प्रतिभा को देश-दुनिया तक पहुंचा सकती है। जिला प्रशासन युवाओं को ऐसे रचनात्मक मंच उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है और बादल आसना जैसी संस्थाएं इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रही हैं।
विशिष्ट अतिथि अनिल जोशी ने नाट्य प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे व्यक्तित्व विकास और सांस्कृतिक संरक्षण का प्रभावी माध्यम बताया। वहीं सुबीर नंदी ने बाहर से आए प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए बस्तर की समृद्ध रंगमंचीय परंपरा से परिचित कराया।
कार्यक्रम का संचालन संस्कृति कर्मी एवं लोक कलाकार भरत गंगादित्य ने किया। इस अवसर पर रंगकर्मी नरेंद्र पाढ़ी, विक्रम सोनी, इंद्राणी नंदी, नूपुर दास, स्मृति पाढ़ी, योगेश साहनी, अनुसुईया चंद्रवंशी, शिव सुब्रमण्यम अय्यर, ललिता अय्यर, हर्षिता अय्यर सहित बड़ी संख्या में रंगकर्मी एवं प्रशिक्षण शिविर के प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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