Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

करपावंड में “विकसित भारत जी-राम जी विधेयक” पर मंथन, 2047 के लक्ष्य के लिए ग्रामीण सशक्तिकरण पर जोर

यह भी पढ़ें -

जगदलपुर:    बस्तर जिले के करपावंड मंडल अंतर्गत ग्राम गारेंगा एवं लावा मोहलाई में “विकसित भारत जी-राम जी विधेयक” विषय पर आयोजित व्यापक कार्यश...

जगदलपुर:   बस्तर जिले के करपावंड मंडल अंतर्गत ग्राम गारेंगा एवं लावा मोहलाई में “विकसित भारत जी-राम जी विधेयक” विषय पर आयोजित व्यापक कार्यशाला में ग्रामीण विकास, पारदर्शिता और रोजगार सुदृढ़ीकरण को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में बस्तर लोकसभा क्षेत्र के सांसद महेश कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

सांसद के ग्राम आगमन पर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने पारंपरिक तिलक एवं पुष्पमालाओं से आत्मीय स्वागत किया। दीप प्रज्वलन और छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र पर माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

अपने संबोधन में सांसद कश्यप ने कहा कि देश “विकसित भारत 2047” के संकल्प की दिशा में अग्रसर है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में ग्रामीण भारत की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक गांव आत्मनिर्भर, आर्थिक रूप से सुदृढ़ और आधारभूत सुविधाओं से संपन्न नहीं होंगे, तब तक विकसित राष्ट्र का सपना अधूरा रहेगा।

सांसद ने बताया कि प्रस्तावित “विकसित भारत जी-राम जी विधेयक” के अंतर्गत प्रति वित्तीय वर्ष गारंटीकृत मजदूरी रोजगार की अवधि 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किए जाने का प्रावधान है। साथ ही मजदूरी भुगतान साप्ताहिक आधार पर अथवा कार्य पूर्ण होने के पखवाड़े के भीतर सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है, जिससे श्रमिकों को समय पर पारिश्रमिक मिल सके।

कृषि कार्यों की महत्ता को ध्यान में रखते हुए बुवाई और कटाई के चरम मौसम में सार्वजनिक कार्यों में कुल 60 दिनों के विराम का प्रावधान भी प्रस्तावित है। इससे किसानों और श्रमिकों के हितों में संतुलन बना रहेगा तथा कृषि उत्पादन प्रभावित नहीं होगा।

सांसद कश्यप ने कहा कि रोजगार से जुड़े कार्यों को जल संरक्षण, ग्रामीण संपर्क मार्गों के निर्माण, भंडारण एवं बाजार ढांचे के विकास तथा प्राकृतिक आपदाओं से बचाव संबंधी संरचनाओं के निर्माण से जोड़ा जाएगा। इससे गांवों में दीर्घकालिक आर्थिक आधार मजबूत होगा और स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए अवसर सृजित होंगे।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि निर्मित परिसंपत्तियों को “विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक” में दर्ज किया जाएगा, जिससे ग्रामीण विकास कार्यों का एक समेकित राष्ट्रीय डाटा तंत्र तैयार होगा। ग्राम पंचायत स्तर पर विकेंद्रीकृत नियोजन को सुदृढ़ कर योजनाओं को राष्ट्रीय नियोजन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा, ताकि पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सके।

कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य ललिता कश्यप, जनपद अध्यक्ष सोनबरी भदरे, उपाध्यक्ष तरुण पांडे, मंडल प्रभारी खितेश मौर्य जनपद सदस्य जगरनाथ सूर्यवंशी, मंडल उपाध्यक्ष पुलकेश्वर सेठिया, महामंत्री बिसम ठाकुर, अर्जुन पांडे, गजरू बघेल, विश्राम दीवान, लिमधर बघेल, उमाकांत पटेल, दयानिधि ठाकुर, दामू ठाकुर,पूरन कश्यप,नवीना दास,लक्ष्मण बघेल, जितेंद्र यादव,अमर सिँह,बालनाथ नेताम,बुधमन यादव,बालसिंह बघेल,सुखलाल मौर्य,रतन कश्यप,भरत कश्यप सहित अनेक जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यशाला के माध्यम से ग्रामीणों को प्रस्तावित विधेयक की प्रमुख विशेषताओं से अवगत कराया गया और विकसित भारत के निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया गया।

No comments