पूर्व विधायक संतोष बाफना ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखा पत्र, भारी वाहनों के लिए समय निर्धारण और पार्किंग व्यवस्था का सुझाव जगदलपुर: ...
पूर्व विधायक संतोष बाफना ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखा पत्र, भारी वाहनों के लिए समय निर्धारण और पार्किंग व्यवस्था का सुझाव
जगदलपुर: बस्तर के प्रवेश द्वार माने जाने वाले केशकाल घाट में लगातार लगने वाले भीषण जाम की समस्या को लेकर अब समाधान की दिशा में पहल तेज हो गई है। जगदलपुर क्षेत्र के पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता संतोष बाफना ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए आंध्रप्रदेश की सालूर घाटी मॉडल लागू करने की मांग की है।
बाफना ने अपने पत्र में बताया कि नारायणपुर, रावघाट, बैलाडीला और नगरनार इस्पात संयंत्र से आने वाले भारी वाहनों के कारण केशकाल घाट में अक्सर घंटों लंबा जाम लग जाता है। इससे आम लोगों के साथ-साथ यात्री बसों और छोटे वाहनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने इस समस्या को गंभीर बताते हुए कहा कि जाम की स्थिति संभालने के लिए पुलिस बल को पूरी रात कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है, जिसका असर उनकी कार्यक्षमता और स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है।
बाफना ने सुझाव दिया कि आंध्रप्रदेश की सालूर घाटी में इसी तरह की भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद ट्रैफिक व्यवस्था को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया गया है। वहां प्रशासन ने भारी वाहनों की आवाजाही पर समय-सीमा लागू कर दी है, जिससे दिन के समय यात्री वाहनों का आवागमन सुगम हो गया है।
इसी तर्ज पर केशकाल घाट में भी रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक भारी मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।
पूर्व विधायक ने यह भी सुझाव दिया कि प्रतिबंधित समय के दौरान भारी वाहनों को व्यवस्थित रखने के लिए केशकाल क्षेत्र के आसपास 2-3 स्थानों को चिन्हित किया जाए। इन स्थानों पर पर्याप्त पार्किंग, शेड और मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएं, ताकि सड़कों पर अव्यवस्था न फैले।
बाफना ने अपने पत्र में केशकाल घाट को बस्तर की जीवनरेखा बताते हुए कहा कि इस मार्ग की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार को जल्द से जल्द ठोस निर्णय लेना चाहिए। इससे न केवल ट्रैफिक व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि आम जनता को भी राहत मिलेगी।
अगर सालूर घाटी मॉडल को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो केशकाल घाट में वर्षों से चली आ रही जाम की समस्या का स्थायी समाधान संभव हो सकता है। अब देखना होगा कि सरकार इस प्रस्ताव पर कितनी तेजी से अमल करती है।


No comments