Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

महिला आरक्षण अधिनियम पर सियासत तेज, रेखचंद जैन ने भाजपा पर साधा निशाना

यह भी पढ़ें -

जगदलपुर (विमलेंदु शेखर झा): महिला आरक्षण अधिनियम को लेकर देशभर में राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। इसी कड़ी में जगदलपुर के पूर्व विधायक एवं...

जगदलपुर (विमलेंदु शेखर झा):

महिला आरक्षण अधिनियम को लेकर देशभर में राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। इसी कड़ी में जगदलपुर के पूर्व विधायक एवं छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस महिला आरक्षण कानून को लेकर भाजपा आज श्रेय लेने की कोशिश कर रही है, वह सितंबर 2023 में ही संसद से पारित हो चुका था।

जैन ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार खुद ही इस कानून को अधिसूचित करना भूल गई थी और हाल ही में विशेष सत्र बुलाकर 17 अप्रैल 2026 को इसे अधिसूचित कराया गया। उन्होंने इसे “राजनीतिक नौटंकी” करार देते हुए कहा कि यह कदम भाजपा की घटती लोकप्रियता का परिणाम है।

उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर निशाना साधते हुए कहा कि हाल के महीनों में उनके बयानों और कार्यों के कारण जनता के बीच उनकी लोकप्रियता में गिरावट आई है, जिससे भाजपा में घबराहट साफ दिखाई दे रही है।

रेखचंद जैन ने कहा कि भाजपा महिला सशक्तिकरण का सिर्फ नारा देती है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा वास्तव में महिला हितैषी होती, तो कांग्रेस द्वारा लोकसभा की एक-तिहाई सीटें (181 सीटें) तत्काल आरक्षित करने की चुनौती को स्वीकार करती।

उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में जब नारी शक्ति वंदन विधेयक पारित हुआ था, तब भाजपा नेताओं ने बस्तर सहित कई स्थानों पर पटाखे फोड़े और मिठाई बांटी थी, लेकिन अब उसी मुद्दे पर भ्रम फैलाया जा रहा है।

जैन ने पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू किया गया था। इसके परिणामस्वरूप आज देशभर में लगभग 15 लाख महिलाएं सरपंच, पंच, पार्षद और अन्य पदों पर कार्य कर रही हैं।

विधेयक की टाइमलाइन

19 सितंबर 2023 – लोकसभा में नारी शक्ति वंदन विधेयक प्रस्तुत

20 सितंबर 2023 – लोकसभा से पारित

21 सितंबर 2023 – राज्यसभा से पारित

29 सितंबर 2023 – राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बना

जैन ने यह भी आरोप लगाया कि विधेयक में परिसीमन का प्रावधान जोड़कर भाजपा भविष्य में सीटों के पुनर्गठन के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही थी, जिसे विपक्ष ने समझ लिया।

महिला आरक्षण अधिनियम को लेकर सियासत लगातार गरमा रही है। एक ओर भाजपा इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बता रही है, वहीं विपक्ष इसे देरी और राजनीतिक स्वार्थ से जोड़कर सवाल उठा रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और अधिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।

No comments