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सावन, वर्षा और पर्यावरण संरक्षण पर सजी काव्य संध्या, साहित्यकारों ने दिया हरित बस्तर का संदेश

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जगदलपुर(विमलेंदु शेखर झा): प्रेम सदन साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था, जगदलपुर द्वारा लाला जगदलपुरी केंद्रीय ग्रन्थालय में "सा...

जगदलपुर(विमलेंदु शेखर झा): प्रेम सदन साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था, जगदलपुर द्वारा लाला जगदलपुरी केंद्रीय ग्रन्थालय में "सावन, वर्षा ऋतु एवं पर्यावरण संरक्षण" विषय पर विशेष काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने तथा वर्षा ऋतु की सुंदरता का साहित्यिक अभिव्यक्ति के माध्यम से उत्सव मनाना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुषमा झा द्वारा माँ शारदे की वंदना से हुआ। इसके बाद नगर के वरिष्ठ एवं युवा कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रकृति, हरियाली, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावशाली संदेश दिया। कविताओं में सावन की फुहार, धरती की प्यास, हरियाली की महत्ता तथा प्रकृति के संरक्षण का भावपूर्ण चित्रण श्रोताओं को भावविभोर करता रहा।

कवि अवध किशोर शर्मा ने दोहे के माध्यम से हरियाली और जल के अटूट संबंध को रेखांकित किया, जबकि विपिन बिहारी दास ने प्रकृति की गोद में बसती जीवन की सुंदरता का चित्र खींचा। डॉ. सुषमा झा ने नीम का पौधा लगाने का संदेश दिया तो डॉ. पूर्णिमा सरोज ने रिमझिम वर्षा और मेघों के राग मल्हार का मनोहारी चित्र प्रस्तुत किया।

नवनीत कमल, गीता शुक्ला, रामेश्वर चंद्रा, भोजराज साहू, श्रीवर सिंह ठाकुर, कृष्ण शरण पटेल, देवश्री गोयल, नीता पांडेय, सतरूपा मिश्रा और शशांक शेंडे सहित अनेक रचनाकारों ने पर्यावरण संरक्षण, जल-संरक्षण, वन संपदा और हरित बस्तर के महत्व पर केंद्रित अपनी-अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। विशेष रूप से शशांक शेंडे की दलपत सागर पर आधारित कविता ने जल संरक्षण की आवश्यकता को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा।

गोष्ठी में बस्तर भूषण से सम्मानित अवध किशोर शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुषमा झा, वरिष्ठ लोकगायक एवं कवि विपिन बिहारी दास, व्यंग्यकार शशांक शेंडे, डॉ. पूर्णिमा सरोज, देवश्री गोयल, सतरूपा मिश्रा, कृष्ण शरण पटेल, रामेश्वर चंद्रा, जयश्री शेंडे, गीता शुक्ला, नीता पांडेय, श्रीवर सिंह ठाकुर, भोजराज साहू, रंजना सिन्हा सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण ही मानव जीवन की सुरक्षा का आधार है। सभी उपस्थितजनों ने "एक व्यक्ति-एक पेड़" लगाने तथा सीड बॉल के माध्यम से हरित बस्तर बनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर देवश्री गोयल द्वारा कपड़े की थैलियों में सीड बॉल का वितरण भी किया गया।

कार्यक्रम को हिंदी साहित्य भारती एवं लाला जगदलपुरी केंद्रीय ग्रन्थालय, जगदलपुर का सहयोग प्राप्त हुआ। संचालन सतरूपा मिश्रा ने किया, जबकि संस्था की ओर से डॉ. पूर्णिमा सरोज ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया। पर्यावरण संरक्षण को समर्पित इस साहित्यिक आयोजन की उपस्थित साहित्य प्रेमियों ने मुक्तकंठ से सराहना की।

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