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लोककला पंडवानी को विश्व पटल पर पहचान दिलाने में रहा अमूल्य योगदान

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जगदलपुर:    संस्कार भारती जिला बस्तर इकाई एवं बादल आसना लोकसंगीत संकाय द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में पद्म विभूषण से सम्मानित सुप्रसिद्ध ...

जगदलपुर:   संस्कार भारती जिला बस्तर इकाई एवं बादल आसना लोकसंगीत संकाय द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में पद्म विभूषण से सम्मानित सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।

श्रद्धांजलि सभा में संस्कार भारती के जिला महामंत्री एवं बादल संस्था के लोकगीत संकाय प्रमुख भरत गंगादित्य ने कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी के माध्यम से देश-विदेश में छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को नई पहचान दिलाई। लोककला के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा।

संस्कार भारती जिला अध्यक्ष जैनेंद्र सिंह ने कहा कि तीजन बाई ने कापालिक शैली में पंडवानी गायन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्हें कला के क्षेत्र में पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए। उनका निधन कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

कार्यकारी अध्यक्ष इंद्राणी नंदी ने तीजन बाई से जुड़ा एक संस्मरण साझा करते हुए उनकी लोकप्रियता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि एक विवाह समारोह में बारात के आगमन की शर्त ही तीजन बाई के पंडवानी गायन की प्रस्तुति थी, जिसे बाद में विशेष रूप से आयोजित करना पड़ा।

इस अवसर पर स्मृति पाढ़ी, नूपुर दास, अनुसुईया चन्द्रवंशी, अमित यादव, सतीश राजपाल, अनीता बघेल, शकुंतला कश्यप सहित अनेक कलाकार उपस्थित रहे।

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