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7–8 वर्षों से मरम्मत का इंतजार: जर्जर हुआ पाकेला आवासीय विद्यालय बालक पोटाकेबिन, विद्यार्थियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

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बसपा जिला अध्यक्ष सोलोमन गांडा ने भवन के तत्काल निरीक्षण, मरम्मत और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई। सुकमा(विमलेंदु शे...

बसपा जिला अध्यक्ष सोलोमन गांडा ने भवन के तत्काल निरीक्षण, मरम्मत और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई।

सुकमा(विमलेंदु शेखर झा):    आवासीय विद्यालयों का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, लेकिन जिला सुकमा के विकासखंड छिंदगढ़ स्थित आवासीय विद्यालय बालक पोटाकेबिन, पाकेला की मौजूदा स्थिति इस उद्देश्य पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है। भवन की जर्जर हालत, क्षतिग्रस्त शौचालय, टूटी हुई दीवारें और खुले सेप्टिक टैंक विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।


स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय भवन की पिछले 7–8 वर्षों से समुचित मरम्मत नहीं कराई गई, जिसके कारण भवन के कई कमरे जर्जर हो चुके हैं। दीवारों का प्लास्टर उखड़ रहा है, कई स्थानों पर दरारें दिखाई दे रही हैं और परिसर में गंदगी एवं काई जमा होने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

विद्यालय के शौचालय पूरी तरह क्षतिग्रस्त एवं अनुपयोगी हो चुके हैं। वहीं सेप्टिक टैंक एवं मैनहोल का ढक्कन टूटा होने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसी स्थिति में यहां अध्ययनरत विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों में चिंता बढ़ती जा रही है।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के जिला अध्यक्ष श्री सोलोमन गांडा ने विद्यालय की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन एवं आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और भवन का तकनीकी परीक्षण कर आवश्यक मरम्मत एवं जीर्णोद्धार शीघ्र कराया जाना चाहिए।

प्रमुख मांगें

  • विद्यालय भवन का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए।
  • जर्जर कमरों एवं शौचालयों की शीघ्र मरम्मत कराई जाए।
  • खुले सेप्टिक टैंक एवं मैनहोल को तत्काल सुरक्षित किया जाए।
  • विद्यालय परिसर की नियमित सफाई एवं रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।
  • मरम्मत कार्य पूरा होने तक विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो भवन की जर्जर स्थिति किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में संबंधित विभागों से अपेक्षा की जा रही है कि वे विद्यालय का शीघ्र निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।



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