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जेल की सलाखें रोक नहीं पाईं राखी की डोर, भाइयों की कलाई पर बहनों ने बांधा रक्षासूत्र

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केंद्रीय जेल जगदलपुर में रक्षाबंधन पर भावुक हुआ माहौल, बहनों की आंखों से छलके आंसू; भाइयों ने नई जिंदगी शुरू करने का लिया संकल्प जगदलपुर। ...

केंद्रीय जेल जगदलपुर में रक्षाबंधन पर भावुक हुआ माहौल, बहनों की आंखों से छलके आंसू; भाइयों ने नई जिंदगी शुरू करने का लिया संकल्प

जगदलपुर। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास की तस्वीर केंद्रीय जेल जगदलपुर में देखने को मिली। जेल की ऊंची दीवारें और सलाखें भी उस पवित्र रिश्ते की डोर को नहीं रोक सकीं। रक्षाबंधन पर बड़ी संख्या में बहनें अपने बंदी भाइयों से मिलने केंद्रीय जेल पहुंचीं और उनकी कलाई पर राखी बांधकर उनके सुखद भविष्य की कामना की।

बहनों के जेल पहुंचते ही माहौल भावुक हो उठा। लंबे समय बाद भाई के सामने पहुंचीं कई बहनों की आंखों से खुशी और दर्द के आंसू छलक पड़े। किसी बहन ने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके माथे पर हाथ रखा, तो किसी ने उसे ढांढस बंधाते हुए जल्द घर लौटने की कामना की। इस दौरान भाई-बहन के बीच भावनाओं का ऐसा सैलाब उमड़ा कि कुछ पल के लिए जेल का वातावरण भी बेहद संवेदनशील हो गया।

बहनों ने अपने भाइयों को राखी बांधते हुए उनसे गलतियों से सबक लेने और भविष्य में दोबारा गलत राह पर नहीं जाने का संकल्प लेने की अपील की। कई बहनों की जुबां पर यही दुआ थी कि उनके भाई जल्द अपने परिवार के बीच लौटें और सामान्य जीवन की नई शुरुआत करें।

वहीं, भाइयों ने भी अपनी बहनों से वादा किया कि जेल से बाहर आने के बाद वे अपनी जिंदगी को नई दिशा देंगे। उन्होंने परिवार के भरोसे को दोबारा कायम करने और ऐसी किसी गलती को नहीं दोहराने का संकल्प व्यक्त किया, जिससे उनके अपनों को दुख पहुंचे।

रक्षाबंधन का यह अवसर सिर्फ राखी बांधने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बंदियों और उनके परिवारों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम भी बना। बहनों के हाथों बंधी राखी ने भाइयों को यह एहसास कराया कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद परिवार का स्नेह और विश्वास उनके साथ है। कई परिवारों के लिए यह मुलाकात उम्मीद, भावनाओं और एक नई शुरुआत का संदेश लेकर आई।

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