जगदलपुर। नगर निगम जगदलपुर के नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी ने शिक्षकों को मूल नियुक्ति तिथि से पेंशन का लाभ नहीं दिए जाने के मुद्दे पर प्रदेश ...
जगदलपुर। नगर निगम जगदलपुर के नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी ने शिक्षकों को मूल नियुक्ति तिथि से पेंशन का लाभ नहीं दिए जाने के मुद्दे पर प्रदेश की भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी एवं शिक्षक विरोधी निर्णय बताया है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान देने वाले शिक्षकों की पूर्व सेवा अवधि को नजरअंदाज करना उनके अधिकारों और सम्मान के साथ अन्याय है।
जारी प्रेस विज्ञप्ति में राजेश चौधरी ने कहा कि पंचायत एवं नगरीय निकायों के अधीन लंबे समय तक सेवाएं देने वाले शिक्षकों के संविलियन के बाद यदि उनकी सेवा की गणना केवल संविलियन की तिथि से की जाएगी, तो सेवानिवृत्ति के बाद अनेक शिक्षकों को बेहद कम पेंशन मिलेगी। उनका दावा है कि कई मामलों में यह राशि मात्र 2,500 से 4,000 रुपये तक सीमित रह सकती है, जो वर्तमान महंगाई के दौर में सम्मानजनक जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए पुरानी पेंशन योजना की बहाली की दिशा में कदम उठाए और पूर्व सेवा अवधि को महत्व दिया था। वर्तमान सरकार को भी संवेदनशीलता दिखाते हुए शिक्षकों की मूल नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना कर पेंशन का लाभ सुनिश्चित करना चाहिए।
राजेश चौधरी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार कर्मचारियों और शिक्षकों से लगातार गैर-शैक्षणिक कार्य करवा रही है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसके बावजूद परीक्षा परिणामों में कमी आने पर शिक्षकों पर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ डालने के बजाय उन्हें शिक्षण कार्य के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकारी शिक्षकों के अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा की अनदेखी जारी रही तो इसका प्रतिकूल प्रभाव प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा। सरकार को चाहिए कि संविलियन से पूर्व की सेवा अवधि को पेंशन निर्धारण में पूर्ण रूप से शामिल कर शिक्षकों के सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करे।
नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो कांग्रेस पार्टी शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों की इस लड़ाई को सड़क से लेकर सदन तक मजबूती से उठाएगी।


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